विश्व शांति, न्याय और मानव गरिमा के प्रति अपने अद्वितीय समर्पण के लिए पोप लियो-14 को अंतरराष्ट्रीय जूरिस्ट्स शांति पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ), लंदन के अध्यक्ष डॉ. आदीश सी. अग्रवाल द्वारा प्रदान किया गया। समारोह नई दिल्ली में एक गरिमामय माहौल में आयोजित हुआ, जहां वेटिकन के अपोस्टोलिक ननसियो आर्कबिशप लियोपोल्डो गिरेली ने पोप की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण किया।
इस अवसर पर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन, झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह, और भारत सरकार के विधायी विभाग के पूर्व सचिव श्री के.डी. सिंह जैसे प्रतिष्ठित न्यायविद उपस्थित थे।
“मानवता का नैतिक दिशा-सूचक हैं पोप लियो-14” — डॉ. आदीश सी. अग्रवाल
अपने संबोधन में डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने कहा कि यह पुरस्कार पोप लियो-14 के “विश्वभर में शांति, न्याय और मानव गरिमा के संवर्धन के प्रति गहन और आजीवन समर्पण” की स्वीकृति है। उन्होंने पोप को “मानवता के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक और अंतरात्मा की आवाज़” बताया, जो दुनिया को उसके मूल मूल्यों — शांति, दया और न्याय — की ओर लौटने की प्रेरणा देते हैं।
डॉ. अग्रवाल ने यह भी कहा कि भारत में यह समारोह आयोजित करना इस तथ्य का प्रतीक है कि “भारत एक ऐसा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जो सभी धर्मों को समान सम्मान देता है।” उन्होंने कहा, “पोप लियो-14 का सम्मान करते हुए हम करुणा की उस शक्ति को सम्मानित कर रहे हैं जो विभाजनों के पार जाकर राष्ट्रों को जोड़ती है — क्योंकि दया के बिना न्याय अधूरा है।”
पोप की ओर से आभार: ‘शांति, न्याय और सत्य ही मानवता के तीन स्तंभ’
पोप की ओर से पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपोस्टोलिक ननसियो आर्कबिशप लियोपोल्डो गिरेली ने कहा कि “इस विशिष्ट सम्मान के लिए पवित्र पिताश्री गहराई से आभारी हैं।” उन्होंने ICJ की न्याय एवं विधि के शासन के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि यह पुरस्कार पोप के उस वैश्विक संदेश की मान्यता है जो “जनजातियों और समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देने, मानव गरिमा की रक्षा करने, और भ्रातृत्व एवं मेल-मिलाप को प्रोत्साहित करने” का आह्वान करता है।
उन्होंने पोप लियो-14 के हालिया संदेश का उल्लेख करते हुए कहा, “मानवता के मार्गदर्शक तीन शब्द होने चाहिए — शांति, न्याय और सत्य, क्योंकि यही आधुनिक विश्व में स्थायी सामंजस्य का आधार बन सकते हैं।”
‘करुणा से संचालित कानून ही शांति का सर्वोत्तम साधन’ — न्यायविदों के विचार
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. के.जी. बालाकृष्णन ने कहा कि “पोप लियो-14 का जीवन शांति, न्याय और करुणा के प्रति आजीवन समर्पण का प्रतीक है। उनकी आवाज़ धर्म, जाति और विचारधारा के विभाजन से भरे इस युग में आशा और मेल-मिलाप की रोशनी बनकर उभरी है।”
न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि “जब कानून को करुणा का मार्गदर्शन प्राप्त होता है, तब वह शांति का सर्वोत्तम साधन बन जाता है।”
वहीं श्री के.डी. सिंह ने कहा कि “विधि का शासन तभी अपने उच्चतम उद्देश्य को प्राप्त करता है जब वह मानवता की नैतिक चेतना को प्रतिबिंबित करे। पोप का संदेश सीमाओं और आस्थाओं से परे है — यह हमें विभाजन की जगह संवाद और उदासीनता की जगह सहानुभूति अपनाने का आह्वान करता है।”
विश्व मंच पर भारत की छवि और पोप की करुणा का संगम
यह समारोह भारत की उस वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित करता है जो विविधता में एकता, सहिष्णुता और मानवता की भावना को सर्वोच्च मानती है। पोप लियो-14 को मिला यह सम्मान न केवल ईसाई जगत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा है — कि शांति और न्याय का मार्ग सदैव करुणा से होकर ही गुजरता है।




