नई दिल्ली
अदाणी को रेड कार्पेट, बिहार को बिजली घोटाला — 60,000 करोड़ की लूट पर कांग्रेस का सीधा वार!
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यालय (PMO) पर अब तक का सबसे सीधा और कड़ा हमला करते हुए कहा कि “पीएमओ अब नीति निर्माण का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का हेडक्वार्टर बन चुका है।” उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं बल्कि कॉर्पोरेट गठजोड़ और सरकारी तंत्र में समाए भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता के विद्रोह का प्रतीक है। वेणुगोपाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि केंद्र में 2017 से 2024 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रहे आर.के. सिंह ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि बिहार में 60,000 करोड़ रुपये का बिजली घोटाला चल रहा है। इस घोटाले की जड़ें प्रधानमंत्री कार्यालय तक जाती हैं — क्योंकि वहीँ से अदाणी समूह को “रेड कार्पेट” बिछाकर विशेष आर्थिक और नीति-आधारित सुविधाएँ दी गईं, ताकि वह बिहार में अपने व्यावसायिक हितों को साध सके।
वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार में बिजली खरीद से जुड़ा जो नया प्रस्ताव लाया गया है, वह जनता की लूट का खुला प्रमाण है। इस प्रस्ताव के तहत राज्य सरकार 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने की तैयारी कर रही है, जबकि वही बिजली अन्य स्रोतों से 4 रुपये या उससे भी कम में मिल सकती है। यह सीधा-सीधा “कॉर्पोरेट लाभ हस्तांतरण” (Corporate Transfer of Wealth) है — गरीब और मध्यम वर्ग की मेहनत की कमाई को सत्ता के करीब बैठे उद्योगपतियों की जेब में पहुंचाने की एक सरकारी योजना। वेणुगोपाल ने कहा कि “यह कोई बिजली सौदा नहीं, बल्कि बिजली घोटाला है। यह वही ‘गुजरात मॉडल’ है जो अब बिहार में लागू किया जा रहा है — जहाँ सरकार का हर फैसला कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हित में और जनता के नुकसान में किया जाता है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय, जो कभी नीति निर्माण और पारदर्शिता का प्रतीक माना जाता था, अब भ्रष्टाचार का कमांड सेंटर बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बड़ा कॉर्पोरेट डील, हर विवादित नीतिगत निर्णय और हर “विशेष अनुमति” का धागा सीधे पीएमओ से जुड़ा है। एनडीए सरकार अब लोकतंत्र नहीं बल्कि “लूटतंत्र” बन चुकी है, जो जनता के टैक्स के पैसे को अपने दोस्तों की कंपनियों में बहा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में जो खेल खेला जा रहा है, वह वर्षों से चल रही उसी कॉर्पोरेट-पॉलिटिकल सांठगांठ का हिस्सा है, जिसमें सत्ता और पूंजी एक साथ मिलकर जनता के अधिकारों को कुचल रहे हैं।
वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की “विकास” की परिभाषा अब उजागर हो चुकी है — यह “विकास” नहीं बल्कि “विनाश” है। इस विनाश का निशाना हैं गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग, जबकि लाभार्थी हैं अदाणी और उनके जैसे पूंजीपति जिनके लिए हर सरकारी संस्था झुक जाती है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद घोटाले का यह उदाहरण बताता है कि कैसे जनता की जरूरतों पर कॉर्पोरेट मुनाफे को तरजीह दी जा रही है। यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर प्रहार है, क्योंकि जब नीतियां जनता की बजाय कुछ घरानों के इशारे पर बनेंगी, तब लोकतंत्र का अर्थ खत्म हो जाएगा।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बिहार की जनता अब इस “लूट के तंत्र” को पहचान चुकी है। एनडीए के नेता चाहे जितना प्रचार कर लें, मगर इस बार जनता उन्हें सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि “जनता देख चुकी है कि कैसे उनके टैक्स के पैसे से सड़कें नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट साम्राज्य बनाए जा रहे हैं। कैसे किसानों की सब्सिडी और मजदूरों की योजनाओं का पैसा पूंजीपतियों के प्रोजेक्ट्स में झोंक दिया गया है।” वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय अब “जनता के हित का केंद्र” नहीं, बल्कि “कॉर्पोरेट हितों का हेडक्वार्टर” बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह घोटाला अब छिपाया नहीं जा सकता। कांग्रेस ने वादा किया है कि 60,000 करोड़ रुपये के इस घोटाले की न्यायिक जांच कराई जाएगी और इसमें शामिल हर व्यक्ति — चाहे वह कितना भी बड़ा पदाधिकारी या राजनेता क्यों न हो — उसे जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को अदालतों से लेकर सड़कों तक लड़ेगी क्योंकि यह सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को बचाने की लड़ाई है।
वेणुगोपाल ने कहा कि अब यह चुनाव “जनता बनाम कॉर्पोरेट गठजोड़” का हो चुका है। एनडीए सरकार की असली पहचान अब जनता के सामने खुल चुकी है — यह सरकार “न्याय” नहीं “निवेश” बेच रही है, यह शासन नहीं “सुविधा का ठेका” दे रही है, यह लोकतंत्र नहीं बल्कि “व्यवसायिक गठजोड़” चला रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संकल्प स्पष्ट है — “हम PMO को भ्रष्टाचार का हेडक्वार्टर नहीं रहने देंगे, उसे जनता के हित का केंद्र फिर से बनाएंगे।” वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार की जनता अब उठ खड़ी हुई है — वे न लूट को स्वीकार करेंगे, न झूठ को। इस बार जनता सच्चाई के साथ है, और सच्चाई का नाम है — भ्रष्टाचार मुक्त भारत, कॉर्पोरेट मुक्त शासन।




