अमनप्रीत सिंह । चंडीगढ़ 16 दिसंबर 2025
जिस खेल मैदान को जुनून, मेहनत और सपनों का मंच माना जाता है, वही मैदान उस वक्त खूनी वारदात का गवाह बन गया, जब यूट्यूब पर LIVE चल रहे कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान एक खिलाड़ी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अपराधियों के हौसले किस हद तक बुलंद हो चुके हैं—जहां कैमरे चालू हों, भीड़ मौजूद हो और फिर भी हत्यारे बेखौफ वारदात को अंजाम दे दें।
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टूर्नामेंट के दौरान आरोपी सेल्फी लेने के बहाने कबड्डी खिलाड़ी के पास पहुंचा। खिलाड़ी को अंदेशा तक नहीं था कि सामने खड़ा शख्स मौत बनकर आया है। कुछ ही पलों में आरोपी ने बेहद नजदीक से ताबड़तोड़ गोलियां दाग दीं। गोलियों की आवाज से मैदान में भगदड़ मच गई, दर्शक चीखने लगे और LIVE स्ट्रीमिंग में सब कुछ कैद होता चला गया। घायल खिलाड़ी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना की सबसे भयावह बात यह है कि पूरा टूर्नामेंट यूट्यूब पर LIVE प्रसारित हो रहा था। यानी हत्या किसी सुनसान जगह पर नहीं, बल्कि कैमरों, दर्शकों और आयोजकों की मौजूदगी में हुई। सवाल उठता है कि इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था आखिर कहां थी? क्या आयोजकों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए थे? और सबसे अहम—अपराधी हथियार लेकर मैदान तक कैसे पहुंच गया?
पुलिस के अनुसार, हत्या पूरी तरह सुनियोजित (planned) लगती है। शुरुआती जांच में आपसी रंजिश, पुरानी दुश्मनी या गैंगवार की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने CCTV फुटेज, LIVE वीडियो और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच तेज कर दी है। कई टीमें गठित की गई हैं, लेकिन घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इस सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब खेल के मैदान भी सुरक्षित नहीं रहे? जहां खिलाड़ी अपने हुनर का प्रदर्शन करने आते हैं, वहां उन्हें अपनी जान गंवानी पड़े—यह सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। सोशल मीडिया पर लोग गुस्से में हैं, खिलाड़ी संगठनों और खेल प्रेमियों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।
यह सिर्फ एक खिलाड़ी की हत्या नहीं है, यह कानून-व्यवस्था की खुली चुनौती है। जब LIVE कैमरों के सामने अपराधी बेखौफ गोलियां चला सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का भरोसा आखिर किस पर टिका है? अब सवाल सिर्फ हत्यारे की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या प्रशासन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसे आयोजनों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएगा—या फिर अगली खबर किसी और मैदान से, किसी और लाश के साथ आएगी।




