अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 25 मई 2026
अमेरिका में लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। ट्रंप ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को “peanuts” यानी “मामूली खर्च” बताया, जिसके बाद विपक्ष और आम लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। आलोचकों का कहना है कि अरबपति पृष्ठभूमि वाले ट्रंप आम अमेरिकी नागरिकों की आर्थिक परेशानियों को समझने में असफल रहे हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में मेमोरियल डे वीकेंड से पहले पेट्रोल की औसत कीमत 4.56 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम आय वाले परिवारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा अब सिर्फ रोजमर्रा के ईंधन खर्च में जा रहा है।
विश्लेषण के अनुसार, सालाना लगभग 40 हजार डॉलर या उससे कम कमाने वाले परिवार अब अपनी आय का करीब 4 प्रतिशत सिर्फ आने-जाने के पेट्रोल खर्च पर खर्च कर रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई, ईंधन संकट और बढ़ती जीवन-यापन लागत ने मध्यम और निम्न आय वर्ग की कमर तोड़ दी है।
ट्रंप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने कहा कि “जिस नेता ने कभी आम आदमी की तरह पेट्रोल भरवाया ही नहीं, उसे कीमतें मामूली ही लगेंगी।” वहीं ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता की वजह से कीमतें बढ़ी हैं और इसका दोष केवल सरकार को नहीं दिया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें हमेशा चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा रही हैं। ऐसे समय में जब आम लोग महंगाई से जूझ रहे हैं, ट्रंप का यह बयान 2026 की अमेरिकी राजनीति में विपक्ष को बड़ा हमला करने का मौका दे सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईंधन की बढ़ती कीमतें सिर्फ परिवहन नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा की वस्तुओं और पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालती हैं। ऐसे में “गैस प्राइस” अब अमेरिका में सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।




