राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 मई 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस दावे के बाद देश की राजनीति गरमा गई है, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बयान को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और सवाल उठाया है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “अपने अच्छे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने” के लिए भारत के आर्थिक हितों से समझौता कर रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अगर इतनी बड़ी व्यापारिक और आयात प्रतिबद्धता की गई है, तो सरकार देश को पूरी सच्चाई बताए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ ऐसा व्यापार समझौता कर रही है, जिससे भारतीय कृषि, घरेलू उद्योग और विदेशी मुद्रा संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने इसे “एंटी-पीपल और खतरनाक ट्रेड डील” करार दिया।
दरअसल, हाल ही में नई दिल्ली दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और टेक्नोलॉजी सहयोग को और मजबूत करने की बात कही थी। रुबियो ने अमेरिका से ऊर्जा और अन्य उत्पादों के बड़े आयात की संभावना का भी जिक्र किया।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री खुद देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भरता की बात करते रहे हैं, तो फिर रिकॉर्ड स्तर पर अमेरिकी आयात की तैयारी क्यों की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ट्रंप प्रशासन के दबाव में आर्थिक फैसले ले रही है, जबकि सरकार समर्थक इसे भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा बता रहे हैं।
इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या भारत-अमेरिका के बीच होने वाले संभावित बड़े व्यापार समझौते का असर भारतीय बाजार, किसानों और घरेलू उद्योगों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा, रक्षा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत कर सकता है, लेकिन व्यापार संतुलन और घरेलू हितों को लेकर बहस आगे और तेज हो सकती है।




