अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद / तेहरान / वाशिंगटन | 27 अप्रैल 2026
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूतों का पाकिस्तान दौरा अचानक रद्द कर दिया है, जिससे ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता पर अनिश्चितता गहरा गई है। यह दौरा इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत के लिए तय था, जहां ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मौजूदगी में अहम चर्चा होनी थी।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि अमेरिका अब पहल नहीं करेगा और अगर ईरान बातचीत चाहता है तो उसे खुद संपर्क करना होगा। इस बयान के बाद पाकिस्तान में होने वाली संभावित वार्ता लगभग ठप हो गई। अराघची भी अपनी एक दिवसीय यात्रा के बाद बिना किसी ठोस नतीजे के लौट गए, जिससे साफ संकेत मिला कि फिलहाल कूटनीतिक प्रक्रिया ठहराव की स्थिति में है।
इस घटनाक्रम के बीच मसूद पेजेश्कियान ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने शहबाज शरीफ के साथ बातचीत में कहा कि किसी भी नई वार्ता से पहले अमेरिका को ईरान के बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर लगी पाबंदियां हटानी होंगी। हाल के महीनों में अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए दबाव के कारण ईरान के तेल निर्यात और समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए कई नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इनमें तेल व्यापार से जुड़े नेटवर्क, शिपिंग कंपनियां और रिफाइनरी इकाइयां शामिल हैं। यह कदम उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वाशिंगटन ईरान के तेल निर्यात को सीमित करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में सैन्य स्थिति भी लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को कुछ समय के लिए बढ़ाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात स्थिर नहीं हैं। बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देश पर इजराइली सेना सतर्क बनी हुई है, जबकि हिज़्बुल्लाह ने भी कड़ा रुख अपनाया हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।
इसके अलावा गाजा क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जहां लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर नागरिकों पर इसका असर बढ़ रहा है और मानवीय संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है।
इस पूरे संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। मध्य-पूर्व में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके अलावा जेट फ्यूल की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका असर एयरलाइंस पर पड़ा है। कई कंपनियों ने अपने कुछ रूट्स पर उड़ानें सीमित की हैं और यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
ओमान की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह देश पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर चुका है। हाल ही में अराघची का ओमान दौरा इसी दिशा में एक प्रयास था, जहां युद्ध को रोकने और बातचीत को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
कुल मिलाकर, स्थिति बेहद जटिल और नाजुक बनी हुई है। एक तरफ कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर सैन्य और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप का पाकिस्तान दौरा रद्द होना इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिसने शांति वार्ता की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या यह टकराव और गहराता जाएगा, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।




