एबीसी नेशनल न्यूज | पटना | 7 फरवरी 2026
आधी रात की कार्रवाई से मचा हड़कंप
बिहार की राजनीति में शुक्रवार देर रात उस वक्त अचानक उबाल आ गया, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को बिहार पुलिस ने उनके पटना स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। आधी रात की इस कार्रवाई ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी, बल्कि सड़कों पर भी तनाव का माहौल पैदा कर दिया। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर फैली, पप्पू यादव के समर्थक उनके आवास के बाहर जुटने लगे और पुलिस की कार्रवाई का खुलकर विरोध शुरू हो गया। देर रात तक हंगामे की स्थिति बनी रही, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल देखने को मिला।
35 साल पुराना मामला फिर चर्चा में
पुलिस के अनुसार पप्पू यादव की गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं, बल्कि करीब 35 साल पुराने एक केस के सिलसिले में की गई है। यह मामला वर्ष 1995 का बताया जा रहा है, जो पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उस समय किराए पर लिए गए एक मकान को राजनीतिक गतिविधियों और कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया गया था, जबकि मकान मालिक को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इसी बात को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला दर्ज किया गया, जो लंबे समय तक अदालत में लंबित रहा।
कोर्ट के आदेश और वारंट की दलील
बताया जा रहा है कि इस पुराने मामले में अदालत द्वारा कई बार पेशी के आदेश दिए गए थे, लेकिन पप्पू यादव कथित तौर पर कुछ सुनवाइयों में उपस्थित नहीं हो सके। इसी आधार पर संबंधित अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। पुलिस का कहना है कि उसी वारंट के तहत यह कार्रवाई की गई है और इसमें किसी तरह की जल्दबाज़ी या राजनीतिक दबाव नहीं है। प्रशासन का तर्क है कि कानून सबके लिए समान है और न्यायालय के आदेश का पालन करना पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
गिरफ्तारी के वक्त बढ़ा तनाव
गिरफ्तारी के दौरान माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया, जब पुलिस टीम उनके आवास पर पहुंची। समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, नारेबाज़ी भी देखने को मिली और कुछ देर के लिए स्थिति बेकाबू होती नजर आई। हालात को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बाद पप्पू यादव को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए ले जाया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे।
पप्पू यादव का पलटवार
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने इसे सीधे तौर पर राजनीतिक साजिश करार दिया। उनका कहना है कि दशकों पुराने मामले को अचानक सक्रिय कर देना यह दिखाता है कि उनके खिलाफ जानबूझकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में पुलिस ने वारंट नहीं दिखाया और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और जनप्रतिनिधियों को दबाने की कोशिश है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा, “यह मामला 35 साल पुराना है, जिसको लेकर अदालत ने मुझे तलब किया था। कल कोर्ट से मुझे बुलावा आया था और आज लोकसभा का सत्र शाम 4 बजे समाप्त हुआ, इसलिए मैं अदालत का सम्मान करते हुए यहां आया। मुझे कल कोर्ट में पेश होना है, लेकिन आज जिस तरह से पुलिस ने व्यवहार किया, वह बेहद खतरनाक और पूरी तरह से अनुचित था…”
बिहार की राजनीति में नई बहस
इस घटना के बाद बिहार की सियासत और ज्यादा गरमा गई है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि पुराने मामलों को हथियार बनाकर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष और प्रशासन का दावा है कि यह पूरी तरह कानूनी कार्रवाई है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। कुल मिलाकर, पप्पू यादव की देर रात गिरफ्तारी ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में कानून, सत्ता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई और तीखी बहस छेड़ दी है।




