इस्लामाबाद, 29 अक्टूबर 2025
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक नए आर्थिक ढांचे (Economic Framework Agreement) पर सहमति जताई है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। इस समझौते का उद्देश्य ऊर्जा, अवसंरचना, खनन, कृषि और आईटी सेक्टर में दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करना है।
यह समझौता पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और सऊदी निवेश मंत्रालय के बीच विस्तृत वार्ता के बाद हुआ। दोनों देशों ने सहमति जताई है कि वे “Saudi-Pakistan Investment Facilitation Council” (SPIFC) के माध्यम से व्यापारिक परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर गति लाएंगे। इसमें खास ध्यान सऊदी अरब के “Vision 2030” और पाकिस्तान के “Economic Revival Plan” को जोड़ने पर रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने पाकिस्तान में ऊर्जा क्षेत्र और रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स में निवेश के संकेत दिए हैं, जबकि पाकिस्तान ने सऊदी कंपनियों को विशेष आर्थिक जोन (SEZs) में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा कृषि, फूड प्रोसेसिंग, और खनन सेक्टर को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को संभालने में मदद कर सकता है, क्योंकि सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को कई बार आर्थिक पैकेज और तेल क्रेडिट की सुविधा दे चुका है। वहीं सऊदी अरब के लिए यह साझेदारी दक्षिण एशिया में अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का एक अवसर है।
दोनों देशों ने यह भी घोषणा की कि वे वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग, डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स के एकीकरण, और युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे, ताकि आर्थिक संबंध सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि निजी क्षेत्र और नागरिकों के बीच भी गहराई से विकसित हों।
कुल मिलाकर, यह समझौता पाकिस्तान-सऊदी संबंधों को एक “तेल और सहायता आधारित साझेदारी” से आगे बढ़ाकर “निवेश और नवाचार आधारित गठबंधन” में बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।




