एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026
विपक्ष का सामूहिक प्रदर्शन
शुक्रवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार के बाहर विपक्षी दलों के सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने तख्तियां थामीं और नारे लगाए—“मोदी–पुरी शर्म करो” और “हरदीप इस्तीफा दो”। यह विरोध उस बयान के बाद तेज हुआ, जिसमें लोकसभा में नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए पुरी का नाम दिवंगत यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जोड़ा। संसद परिसर में माहौल कुछ देर तक बेहद तनावपूर्ण रहा और मीडिया के सामने आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा।
‘चार मुलाकात नहीं, गहरे संबंध’
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अब तक सार्वजनिक डोमेन में आई जानकारी और अमेरिकी दस्तावेजों के आधार पर हरदीप पुरी और एपस्टीन के बीच संबंध सामान्य औपचारिक मुलाकात से कहीं आगे के दिखाई देते हैं। उनका आरोप है कि लगभग 30 लाख ईमेल सार्वजनिक होने के बाद जो विवरण सामने आए हैं, उनमें दोनों के बीच कई बार ईमेल का आदान-प्रदान दर्ज है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल “तीन-चार मुलाकात” का मामला नहीं है, बल्कि संपर्क और संवाद का दायरा कहीं व्यापक प्रतीत होता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे गंभीर नैतिक प्रश्न के रूप में उठा रहा है और कह13 रहा है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक मंत्री को पद पर बने रहना उचित नहीं है।
राहुल गांधी का आरोप: ‘दस्तावेजों में दर्ज है नाम’
राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिनमें हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम एपस्टीन से जुड़े रिकॉर्ड में दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि वे तथ्यों की पुष्टि कर रहे हैं और मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि गंभीर सार्वजनिक जवाबदेही का है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि किसी केंद्रीय मंत्री का नाम ऐसे विवादित अंतरराष्ट्रीय मामले में आता है, तो सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए और स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आरोप निराधार हैं, तो सरकार औपचारिक जांच से क्यों पीछे हटे।
हरदीप पुरी का पलटवार: ‘बेबुनियाद और संदर्भ से हटाए गए आरोप’
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप हैं और तथ्यों को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। पुरी ने स्पष्ट किया कि 2009 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में न्यूयॉर्क में तैनाती के दौरान वे अनेक आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल हुए, जहां विभिन्न व्यक्तियों से मुलाकात होना स्वाभाविक था। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों में यदि तीन या चार बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मुलाकात हुई भी हो, तो उसका एपस्टीन पर लगे अपराधों से कोई संबंध नहीं है। पुरी का कहना है कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध ईमेल रिकॉर्ड को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री से जवाब की मांग, सदन में तीखी बहस
विपक्ष ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी इस मामले पर स्पष्ट बयान देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक मंत्री का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकार की नैतिक जिम्मेदारी और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा प्रश्न है। सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष अधूरी और अपुष्ट जानकारी के आधार पर राजनीतिक माहौल गरमाने की कोशिश कर रहा है। संसद के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सत्र की कार्यवाही प्रभावित हुई।
आगे की राह: राजनीतिक संग्राम या औपचारिक जांच?
फिलहाल मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है, जबकि मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। यदि अमेरिकी एजेंसियों या किसी आधिकारिक स्रोत से और तथ्य सामने आते हैं, तो विवाद की दिशा स्पष्ट हो सकती है। अभी के लिए यह मुद्दा संसद और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है, जहां जवाबदेही, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।




