आलोक कुमार । नई दिल्ली 1 दिसंबर 2025
राज्यसभा में सोमवार को विपक्ष ने SIR (Special Input Revision) मामले को लेकर जोरदार आवाज़ उठाई और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि वह इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को बांटने की कोशिश कर रही है। विपक्षी दलों के संयुक्त रुख को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में बेहद स्पष्ट और तीखे शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष का सामूहिक निर्णय है कि SIR पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए।
खड़गे ने बताया कि सुबह सभी विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स उनके कक्ष में एकत्रित हुए और सर्वसम्मति से फैसला किया कि SIR को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे, चुनावी प्रक्रिया और आम लोगों की सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस महत्वपूर्ण विषय को सूची में पहले नहीं लाया गया, तो पूरा विपक्ष मजबूर होकर विरोध दर्ज कराएगा।
खड़गे ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “सस्ती राजनीति और गिमिक से हमें बांटना मत”— क्योंकि विपक्ष किसी व्यक्तिगत मजबूरी से नहीं, बल्कि वैचारिक पृष्ठभूमि से यहां खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, विपक्ष एकजुट है और रहेगा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि देश भर में लोकतंत्र की हत्या की कोशिशें हो रही हैं, जबकि SIR जैसे मामलों में लोगों की जान जा रही है। ऐसे में चर्चा रोकना न सिर्फ असंवेदनशीलता है बल्कि संसदीय मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।
सदन में उनके बाद कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार को और कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि SIR के दबाव में अब तक 20 से अधिक BLO (Booth Level Officers) अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने सबसे ताज़ा घटना का उल्लेख किया जिसमें मुरादाबाद के BLO सर्वेश सिंह ने आत्महत्या कर ली। तिवारी ने दुःख और आक्रोश के साथ पूछा, “सरकार और कितनी जानें लेना चाहती है?” उन्होंने याद दिलाया कि यह पहला अवसर नहीं है जब सदन में चुनाव सुधार या उससे जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की मांग उठी हो, लेकिन सरकार बार-बार इससे भागती दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि संसद का दायित्व है कि वह जनता के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों पर खुलकर चर्चा करे, विशेषकर तब जब ये मुद्दे सीधे जान, सुरक्षा और लोकतंत्र से जुड़े हों। BLO की मौतों का हवाला देते हुए तिवारी ने कहा कि चुनावी व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत पर पहले भी कई बार सहमति बनी है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसे और अधिक जरूरी और आपातकालीन बना दिया है।
सदन में विपक्ष की इस संयुक्त आवाज़ ने SIR मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। यह देखा जाना अब महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस दबाव और लगातार बढ़ रहे प्रश्नों का क्या जवाब देती है और क्या वह इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा के लिए तैयार होती है या नहीं।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि
विपक्ष के पास न सरकार है, न अफसर हैं और न दफ्तर हैं। एक संसद ही है, जहां हम अपनी बात रखने आते हैं। अगर विपक्ष सदन में भी अपनी बात नहीं रख पाया, तो उसके पास कुछ नहीं बचेगा। इसलिए सदन का चलना बेहद जरूरी है।




