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शतक एक, धमाका अनेक: रांची में विराट कोहली का तूफ़ान, तेंदुलकर के महारिकॉर्ड को तोड़ा

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संजीव कुमार । रांची 30 नवंबर 2025

रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में रविवार का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में विराट कोहली ने न सिर्फ शतक जड़ा, बल्कि उस शतक के सहारे ऐसे-ऐसे रिकॉर्ड तोड़ डाले, जिनके सामने क्रिकेट इतिहास का सबसे मज़बूत पहाड़ भी छोटा पड़ गया। 102 गेंदों में विराट ने वह करिश्मा कर दिखाया, जिसकी प्रतीक्षा क्रिकेट जगत वर्षों से कर रहा था—एक ऐसा माइलस्टोन जिसे छूना तो दूर, उसके करीब जाना भी कई बल्लेबाजों के लिए सपना भर है।

विराट कोहली ने रांची की पिच पर अपना अडिग क्लास दिखाते हुए आक्रामकता और धैर्य का ऐसा मिश्रण बनाया कि साउथ अफ्रीका के गेंदबाज पसीने-पसीने हो गए। कई महीनों बाद यह पहली बार था जब कोहली अपनी ‘विंटेज फॉर्म’ में नज़र आए—सीधे बल्ले से ड्राइव, कवर से बहती कविताई स्ट्रोक्स और बीच-बीच में उफनती हुई आक्रामकता। जैसे-जैसे वे 70, 80, 90 के पार गए, पूरे स्टेडियम में शोर ऐसा उठने लगा मानो रांची खुद विराट की उपलब्धियों को सलामी दे रही हो।

लेकिन कहानी सिर्फ शतक तक सीमित नहीं है। यह कोहली का वनडे करियर का 52वां शतक था—और इसके साथ ही वह दुनिया के पहले ऐसे बल्लेबाज़ बन गए हैं, जिन्होंने किसी भी एक फॉर्मेट में सबसे ज्यादा शतक जड़े हों। इस रिकॉर्ड से आगे हैं अब केवल विराट और विराट; क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचकर उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों के उस बेमिसाल रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। सचिन तेंदुलकर, जिनकी गिनती क्रिकेट के देवता के रूप में होती है—उनकी रिकॉर्डबुक पर यह विराट का ‘विराट’ हस्ताक्षर है।

साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी विराट का यह शतक ऐतिहासिक है। यह उनके करियर का इस विरोधी के खिलाफ छठा वनडे शतक है, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा SA के खिलाफ बनाए गए शतकों में सर्वाधिक है। यह कोई संयोग नहीं है; साउथ अफ्रीका हमेशा विराट के बल्ले का प्रिय शिकार रहा है। बड़े टारगेट हों या कठिन परिस्थिति—विराट के सामने अफ्रीकी गेंदबाजों का धैर्य अक्सर टूटता है, और रांची में वही दृश्य फिर दोहराया गया।

मैच का संदर्भ भी कम महत्वपूर्ण नहीं था। टीम इंडिया हाल ही में टेस्ट सीरीज हारकर उतरी थी और टीम को किसी ऐसे बड़े प्रदर्शन की तलाश थी, जो मनोबल को ऊपर उठाए। विराट की पारी ने यही किया—विश्वास जगाया, ऊर्जा भरी और यह संकेत दिया कि भारतीय क्रिकेट अभी भी मजबूत है और उसका सबसे बड़ा योद्धा एक बार फिर कंधों पर जिम्मेदारी उठा चुका है। भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी कोहली के इस शतक की चमक साफ दिखाई दी—साथियों की मुस्कान, कप्तान का भरोसा और दर्शकों की गर्जना, सब एक सुर में कह रहे थे—किंग इज़ बैक।

शतक के बाद मैदान पर एक और दिलचस्प ड्रामा तब देखने को मिला जब एक प्रशंसक सुरक्षा घेरा तोड़कर पिच की ओर दौड़ पड़ा। यह दृश्य बताता है कि विराट सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों की धड़कन हैं। उनके हर शतक, हर रिकॉर्ड और हर स्ट्रोक के पीछे एक भावनात्मक जुड़ाव है जो उन्हें सिर्फ क्रिकेट का महान खिलाड़ी नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय प्रतीक बनाता है।

आगे की सीरीज में भी विराट से उम्मीदें आसमान छू रही हैं। उनकी इस ऐतिहासिक पारी ने भारत को बड़े स्कोर की ओर बढ़ाया है और साथ ही टीम के मनोबल को नई ऊंचाई दी है। क्रिकेट विश्लेषक कह रहे हैं कि विराट जिस अंदाज़ में लौटे हैं, यह सीरीज शायद उनके करियर की ‘एक और सुनहरी कहानी’ गढ़ने जा रही है। फैंस के लिए अब हर मैच एक उत्सव है और हर बार कोहली क्रीज पर हों, रोमांच का स्तर चरम पर होता है।

क्रिकेट के इस नए अध्याय में एक बात बिल्कुल साफ है—रिकॉर्ड तेंदुलकर का था, लकीर कोहली ने लंबी खींच दी। और रांची के मैदान पर जो हुआ, उसने एक बार फिर दुनिया को बता दिया—विराट कोहली सिर्फ खेलते नहीं, इतिहास लिखते हैं।

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