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वरिष्ठ नागरिकों की नई जीवनशैली: अब रिटायरमेंट का मतलब आराम नहीं, नए सपनों की शुरुआत

लखनऊ, उत्तर प्रदेश 

 5 अगस्त 2025 

एक समय था जब रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी को बस विश्राम और तीर्थयात्रा तक सीमित माना जाता था। लेकिन अब 2025 का भारत बदल चुका है — और उसके साथ बदल चुकी है वरिष्ठ नागरिकों की जीवनशैली।

लखनऊ, पुणे, कोच्चि, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में अब 60 पार के लोग न केवल सक्रिय हैं, बल्कि नए व्यवसाय, यात्राएं, ऑनलाइन कोर्स, समाजसेवा और फिटनेस गतिविधियों में खुलकर भाग ले रहे हैं।

67 वर्षीय मधु गुप्ता, जो लखनऊ में एक सरकारी स्कूल की पूर्व प्रधानाचार्या थीं, अब ‘सीनियर वेलनेस क्लब’ चला रही हैं जहाँ योग, गार्डनिंग, वाचनालय और डिजिटल साक्षरता सिखाई जाती है। वहीं 74 साल के रामेश्वर नाथ अब यूट्यूब पर ‘स्मार्ट एजिंग टिप्स’ नाम से हेल्थ और डाइट के वीडियो बनाते हैं, जिन्हें लाखों लोग देख रहे हैं।

ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म जैसे कि SWAYAM और Coursera अब सीनियर सिटीज़न्स को मुफ़्त या रियायती पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं। कई रिटायर्ड इंजीनियर, टीचर, और डॉक्टर अब गांवों में जाकर वॉलंटियर टीचिंग और हैल्थ कैंप चला रहे हैं।

फिटनेस भी पीछे नहीं। अब ‘सीनियर मैराथन’, ’60+ योग शिविर’, और ‘डांस विद डिग्निटी’ जैसे आयोजनों में भाग लेकर बुज़ुर्ग न केवल खुद को शारीरिक रूप से फिट रखते हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी सक्रिय रहते हैं।

इस बदलाव को देखते हुए कई राज्य सरकारें और एनजीओ भी ‘एक्टिव एजिंग मिशन’ शुरू कर चुकी हैं, जिसके तहत सीनियर सिटीज़न्स को दोबारा आत्मनिर्भर और प्रेरणादायक जीवन जीने का मौका दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह न केवल बुज़ुर्गों के लिए बेहतर है, बल्कि परिवार और समाज को भी एक नया दृष्टिकोण देता है — जिसमें उम्र सिर्फ एक संख्या है, ऊर्जा और उत्साह हमेशा भीतर से आता है।

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