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NEET पेपर लीक से छात्रों और परिवारों को गहरा आघात, भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी संस्थाओं की: सुप्रीम कोर्ट

शिक्षा | विशेष संवाददाता | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 मई 2026

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, छात्रों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिरने की पीड़ा जताई

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2024 और 2026 पेपर लीक मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गहरे मानसिक आघात का कारण बनती हैं। अदालत ने माना कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं और उनके परिवार भावनात्मक, आर्थिक तथा सामाजिक स्तर पर भारी निवेश करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत, उम्मीदों और विश्वास को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक होता है तो उसका असर केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लाखों परिवारों की उम्मीदों और सपनों को झकझोर देता है। अदालत ने टिप्पणी की कि छात्रों और अभिभावकों के लिए यह स्थिति अत्यंत दर्दनाक और मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती है।

NTA और अन्य संस्थाओं को विकसित करनी होगी जवाबदेही की संस्कृति

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उन्हें “संस्थागत स्मृति” और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी ताकि एक बार हुई गलतियों की पुनरावृत्ति न हो। अदालत ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा संस्था का दायित्व केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं बल्कि उसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता को हर हाल में बनाए रखना भी है।

न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि संस्थाएं अपनी पिछली त्रुटियों से सबक नहीं सीखतीं और सुधारात्मक व्यवस्था विकसित नहीं करतीं, तो ऐसे संकट बार-बार सामने आते रहेंगे। इसलिए भविष्य के लिए एक मजबूत, सुरक्षित और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

NTA ने सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताया कि पेपर लीक की शिकायतें सामने आने के बाद कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय छात्रों के हितों और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था।

NTA के अनुसार परीक्षा रद्द करने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया था। एजेंसी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच व्यापक असंतोष देखा गया। हजारों छात्रों ने महीनों और वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के कारण पूरी परीक्षा रद्द होने से उन्हें दोबारा परीक्षा की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

कई छात्र संगठनों ने भी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और परीक्षा सुरक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है। छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं उनके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर रही हैं।

21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट पर टिकी निगाहें

केंद्र सरकार और NTA अब 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG री-टेस्ट को पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ आयोजित करने की तैयारी में जुटे हैं। रिपोर्टों के अनुसार प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना सहित रक्षा प्रतिष्ठानों की सहायता लेने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

सरकार का मानना है कि री-टेस्ट की निष्पक्ष और सुरक्षित प्रक्रिया ही छात्रों तथा अभिभावकों का भरोसा दोबारा जीतने का सबसे प्रभावी तरीका होगी।

परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NEET पेपर लीक विवाद केवल एक परीक्षा की समस्या नहीं बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र प्रबंधन, निगरानी तंत्र, जवाबदेही निर्धारण और तकनीकी ऑडिट जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाना कठिन होगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी इसी दिशा में संकेत करती है कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जहां पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम रह जाए। लाखों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को देखते हुए यह अब राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बन चुका है।

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