एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 12 मार्च 2026
एलपीजी संकट ने संसद की राजनीति गरमाई
देश में एलपीजी सिलेंडरों की कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर गुरुवार को संसद भवन परिसर में विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। गैस आपूर्ति में आई दिक्कतों और महंगाई के मुद्दे को लेकर कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए तीखे नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने पोस्टर और बैनर लेकर संसद परिसर में धरना दिया और सरकार से गैस संकट पर तत्काल जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण होटल, रेस्तरां, ढाबों और छोटे कारोबारों पर गंभीर असर पड़ा है, जबकि आम जनता भी महंगाई और गैस की उपलब्धता को लेकर परेशान है।
प्रियंका गांधी के नेतृत्व में महिला सांसदों का प्रदर्शन
कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra के नेतृत्व में महिला सांसदों ने भी संसद परिसर में प्रदर्शन में हिस्सा लिया। महिला सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से जमीन पर बैठकर चूल्हा जलाने का प्रदर्शन किया और यह दिखाने की कोशिश की कि गैस संकट का असर सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच रहा है। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। विपक्षी सांसदों ने संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को देश में गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
नारों के जरिए सरकार पर तीखा हमला
प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों ने पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया। विपक्षी सांसदों ने “नरेंदर भी गायब… सिलेंडर भी गायब…” और “नाम नरेंदर… काम सरेंडर…” जैसे नारे लगाकर सरकार को घेरा। इन नारों के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार देश में बढ़ती महंगाई और गैस संकट को लेकर जवाबदेह है। संसद परिसर में गूंजे इन नारों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया और मीडिया तथा राजनीतिक गलियारों में भी इस विरोध प्रदर्शन की व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
महंगाई और गैस आपूर्ति पर सरकार को घेरा
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और गैस की कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति में भी समस्या सामने आ रही है। उनका कहना है कि कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण होटल और रेस्तरां कारोबारियों को कामकाज चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे भोजनालय और ढाबा संचालक भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं। विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार की नीतियों और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है, लेकिन सरकार इस स्थिति को लेकर स्पष्ट रूप से जवाब देने से बच रही है।
राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भी एलपीजी संकट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और अब गैस की कमी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार लोगों से घबराने की बात न करने की अपील कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने और सरकार से जवाब मांगने की बात कही।
संसद की कार्यवाही पर भी पड़ा असर
एलपीजी संकट को लेकर हुए इस विरोध प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। नारेबाजी और विरोध के कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरम हो गया और कार्यवाही को थोड़ी देर के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीतिक नाटक का हिस्सा नहीं बल्कि आम आदमी की रसोई से जुड़े गंभीर मुद्दे को उठाने की कोशिश है। उनका कहना है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब नहीं देती और गैस आपूर्ति को सामान्य बनाने के ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक यह मुद्दा संसद और सड़कों दोनों जगह उठाया जाता रहेगा।
संकट और सियासत के बीच जनता की चिंता
एलपीजी संकट ने जहां आम जनता और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति का भी बड़ा विषय बन गया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार की ओर से स्थिति पर नजर रखने और आपूर्ति सामान्य करने के प्रयासों की बात कही जा रही है। फिलहाल देश की नजर इस बात पर टिकी है कि गैस की आपूर्ति कब तक सामान्य होगी और क्या सरकार इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए आगे आती है या नहीं।





