एबीसी नेशनल न्यूज | बिज़नेस डेस्क | 10 मार्च 2026
मध्य-पूर्व में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब भारत की रसोई, होटल और अर्थव्यवस्था को सीधे निशाना बना रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ठप होने से एलपीजी (LPG) की वैश्विक सप्लाई चेन टूट गई है—और भारत, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक, अब संकट के केंद्र में है।
बेंगलुरु में हाहाकार: होटल-रेस्टोरेंट आज से बंद
बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन (Bangalore Hotels Association) ने 9 मार्च को ऐलान किया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई अचानक बंद होने से शहर के सैकड़ों होटल और रेस्टोरेंट 10 मार्च (आज) से किचन बंद कर देंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष पी.सी. राव ने कहा, “गैस सप्लाई रुक गई है—होटल बंद हो जाएंगे।” कई रिपोर्ट्स में 25-30 होटल्स पहले ही प्रभावित बताए गए, और अगर सप्लाई नहीं बहाल हुई तो शहरव्यापी बंदी की चेतावनी है। इसी तरह चेन्नई, मुंबई और अन्य शहरों में भी होटल एसोसिएशन अलर्ट मोड पर हैं—NRAI (National Restaurant Association of India) ने “कैटास्ट्रोफिक क्लोजर” की आशंका जताई है।
सरकार की इमरजेंसी एक्शन: रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आदेश
संक्रमण के पहले हफ्ते में ही केंद्र सरकार ने इमरजेंसी पावर यूज की और रिफाइनरियों (IOC, HPCL, BPCL) को LPG उत्पादन अधिकतम करने व अतिरिक्त उत्पादन को सिर्फ घरेलू (डोमेस्टिक) यूज के लिए डायवर्ट करने का सख्त आदेश दिया। इसका मतलब साफ है—घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता, कमर्शियल (होटल-रेस्टोरेंट) सिलेंडरों की सप्लाई पर ब्रेक लग गया। 7 मार्च से घरेलू 14.2 kg सिलेंडर ₹60 महंगा (दिल्ली में ₹913) और कमर्शियल 19 kg सिलेंडर ₹115 महंगा हो चुका है।
जड़: होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध का कहर
दुनिया का 20-30% तेल-गैस इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान के मिसाइल हमलों, जहाजों पर हमले के डर और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल से शिपिंग कंपनियां रूट छोड़ रही हैं। भारत अपनी 85-90% LPG जरूरत कतर, सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है—अब ये सप्लाई या तो रुकी हुई है या देरी से आ रही है। भारत के पास LPG के सिर्फ 10-20 दिनों के स्टॉक बचे हैं, जबकि क्रूड ऑयल के लिए स्ट्रैटेजिक रिजर्व हैं।
आम आदमी पर असर: महंगाई की नई लहर?
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं—अगर जंग लंबी चली तो घरेलू गैस भी महंगी और दुर्लभ हो सकती है। पैनिक में लोग एजेंसियों पर लाइन लगा रहे हैं, होर्डिंग की खबरें आ रही हैं। होटल-रेस्टोरेंट बंद होने से लाखों डेली वेज वर्कर्स, स्टूडेंट्स और मरीजों को रोजाना खाना मुश्किल।
यह जंग अब सिर्फ मिडिल ईस्ट की नहीं—यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कारोबार और आम आदमी की जेब पर सीधा वार है। सरकार की प्राथमिकता घरेलू यूजर्स को बचाना है, लेकिन कमर्शियल सेक्टर में हाहाकार मचा हुआ है। क्या यह संकट महंगाई की नई सुनामी बन जाएगा? स्थिति पर नजर टिकी है।




