अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रोम/वॉशिंगटन | 1 अप्रैल 2026
ट्रंप के “NATO शून्य है” बयान के बाद यूरोप में नाराज़गी
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बयान—“अमेरिका के बिना NATO कुछ भी नहीं”—ने पश्चिमी सैन्य गठबंधन के भीतर हलचल तेज कर दी है। लेकिन इस बहस को और तीखा बना दिया इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की एक कथित प्रतिक्रिया ने, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और चर्चा का केंद्र बन गई है। वायरल दावों के अनुसार, मेलोनी ने ट्रंप के बयान पर तंज कसते हुए कहा—“तो क्या हम आपके सैन्य ठिकाने बंद कर दें, व्यापार रोक दें या फिर मैकडॉनल्ड्स पर ही धावा बोल दें?” हालांकि इस बयान की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके व्यापक प्रसार ने NATO के भीतर मतभेदों की तस्वीर को और उभार दिया है।
दरअसल, यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक सोच में फर्क साफ दिखाई दे रहा है। खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष को लेकर यूरोप ज्यादा सतर्क और सीमित भूमिका चाहता है, जबकि अमेरिका अपने सहयोगियों से अधिक सक्रिय समर्थन की उम्मीद कर रहा है। यही असंतुलन अब सार्वजनिक बयानों में भी झलकने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Donald Trump का बयान NATO की सामूहिक ताकत को कमतर दिखाता है, जिससे सहयोगी देशों में असहजता बढ़ना स्वाभाविक है। वहीं Giorgia Meloni की कथित प्रतिक्रिया—भले ही अपुष्ट हो—यूरोप के भीतर पनप रही नाराज़गी और असंतोष का संकेत जरूर देती है।
इस घटनाक्रम का असर NATO की वैश्विक छवि पर भी पड़ सकता है। जब गठबंधन के प्रमुख सदस्य सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे की भूमिका पर सवाल उठाते हैं, तो इससे उसकी एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि चीन और रूस जैसे देश पहले ही NATO की एकता को चुनौती देते रहे हैं—ऐसे में इस तरह की बयानबाजी उन्हें और अवसर दे सकती है।
ट्रंप के बयान और मेलोनी की वायरल प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि NATO के भीतर तनाव बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि यह टकराव केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले समय में गठबंधन की दिशा और मजबूती पर भी असर डालता है।




