लखनऊ, 28 अक्टूबर 2025:
बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने आज केंद्र और राज्य सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश में नफरत और वैमनस्य फैलाने वाली राजनीति ने कानून-व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने और धर्म के नाम पर ज़हर घोलने वाले तत्व अब खुलेआम सक्रिय हैं, और सरकारें चुपचाप देख रही हैं।
“मुस्लिम लड़की लाओ, नौकरी पाओ” – नफरत फैलाने वाली सोच की निंदा
मायावती ने कहा कि “‘मुस्लिम लड़की लाओ, नौकरी पाओ’ जैसे संकीर्ण और घृणित नारे न सिर्फ़ समाज को बांटने वाले हैं बल्कि महिला गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का भी अपमान हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व धार्मिक विद्वेष फैलाकर युवाओं के बीच हिंसक सोच को जन्म दे रहे हैं, जो देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा है।
‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन कानूनों पर भी सवाल
बीएसपी सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में लागू किए गए ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के नाम पर निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है और समाज में भय और अविश्वास का माहौल बनाया जा रहा है। मायावती ने कहा, “धर्म परिवर्तन, शादी या व्यक्तिगत संबंधों को ‘नफरत’ के रंग में रंगना बेहद ख़तरनाक है। यह खेल समाज को तोड़ने की साज़िश है, जिसे सरकारों की शह मिली हुई लगती है।”
“अराजक तत्वों को संरक्षण दे रही हैं सरकारें”
मायावती ने कहा कि ऐसे तत्व जो नफरत फैलाने में लगे हैं, वे सभ्य और संवैधानिक शासन के लिए खुली चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने चेताया कि यदि सरकारें इन्हें संरक्षण देती रहीं, तो आने वाले समय में “कानून का राज” एक मज़ाक बन जाएगा। उन्होंने कहा, “राज्य की करोड़ों जनता के हित में आवश्यक है कि सरकारें इन लोगों के खिलाफ़ कठोर कार्रवाई करें और कानून का शासन स्थापित करें।”
“जनहित के नाम पर राजनीति बंद हो”
बीएसपी प्रमुख ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे दलों को अब यह समझना होगा कि समाज में नफरत फैलाकर और वोट की राजनीति करके देश को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि “जनहित और देशहित की राजनीति वही है जो अमन, भाईचारे और समान अवसरों की गारंटी दे।”





