अमरनाथ प्रसाद | मुंबई 8 जनवरी 2026
महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर निगम की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के 12 नवनिर्वाचित पार्षदों ने पार्टी से निलंबन के ठीक एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ अंबरनाथ बल्कि पूरे महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा दी है। नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करने वाले इन 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में कांग्रेस नेतृत्व ने सस्पेंड कर दिया था। कांग्रेस की इस कार्रवाई के 24 घंटे के अंदर ही सभी पार्षदों ने सामूहिक रूप से बीजेपी में शामिल होकर अपने राजनीतिक रुख को पूरी तरह बदल दिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद इन पार्षदों ने दावा किया कि कांग्रेस में उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी और स्थानीय विकास कार्यों में लगातार अनदेखी हो रही थी। उन्होंने कहा कि वे अंबरनाथ के विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए बीजेपी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर यह फैसला लेने को मजबूर हुए।
बीजेपी नेताओं ने इन सभी पार्षदों का पार्टी में स्वागत करते हुए इसे कांग्रेस की कमजोर संगठनात्मक स्थिति और आंतरिक कलह का परिणाम बताया। बीजेपी का कहना है कि यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस का जनाधार और नेतृत्व दोनों कमजोर हो रहे हैं, जबकि बीजेपी पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को “अवसरवादी राजनीति” करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन पार्षदों को अनुशासनहीनता के कारण निलंबित किया गया था और अब बीजेपी में जाना उनके असली इरादों को उजागर करता है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी स्थानीय राजनीति में तोड़-फोड़ की नीति अपना रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 12 पार्षदों का एक साथ पार्टी बदलना नगर निगम की सत्ता समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। अंबरनाथ नगर निगम में इससे बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जबकि कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। अंबरनाथ में हुआ यह सियासी घटनाक्रम आने वाले समय में महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में और बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है।




