अंतरराष्ट्रीय डेस्क 16 नवंबर 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प ने 14 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक आर्थिक फैसला लेते हुए दो सौ से अधिक खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर लगे आयात शुल्क (टैरिफ) को तुरंत प्रभाव से हटाने की घोषणा कर दी। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिका में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं और आम अमेरिकी बढ़ते किराना-खर्च से परेशान था। बीफ, कॉफी, केले, नारंगी जूस, कोको, मसाले, उर्वरक और कई अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर लगे ये टैरिफ घरेलू मार्केट में महंगाई बढ़ा रहे थे। ग्राउंड बीफ की कीमतें लगभग 13% और स्टेक 17% तक महंगा हो चुका था, जिससे ट्रम्प प्रशासन पर बढ़ता जनदबाव साफ दिख रहा था।
ट्रम्प प्रशासन का यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है, बल्कि यह उनकी आर्थिक नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। शुरुआती वर्षों में राष्ट्रपति ट्रम्प ने आयात शुल्कों को अमेरिकी उद्योग की मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए बहुत सख्ती से लागू किया था। लेकिन अब प्रशासन ने स्वीकार किया है कि “कुछ मामलों में” ये टैरिफ खाद्य महंगाई को बढ़ा रहे थे। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब हाल में हुए स्थानीय चुनावों में मतदाताओं ने “महंगाई और खरीद की क्षमता” को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह आर्थिक कदम ट्रम्प की रणनीतिक वापसी माना जा रहा है।
इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय आयात-व्यापार पर भी गहरा असर पड़ेगा। अमेरिका ने अर्जेंटीना, ग्वाटेमाला, इक्वाडेमोर और अल सल्वाडोर सहित कई देशों के साथ कृषि-उत्पादों को लेकर प्रारंभिक व्यापार समझौते किए हैं। टैरिफ हटने के बाद इन देशों से आने वाली वस्तुएँ अब अमेरिकी बाजार में सस्ती होंगी और इससे आपूर्ति-श्रृंखला को स्थिरता मिलेगी। खाद्य उद्योग ने इस फैसले का स्वागत किया है। Food Industry Association ने कहा है कि इससे आम उपभोक्ताओं और सप्लाई-चेन दोनों को राहत मिलेगी, और कीमतों में गिरावट सीधे बाजार में महसूस की जाएगी।
हालाँकि आलोचक इसे ट्रम्प प्रशासन की पहले की कठोर व्यापार नीतियों की “चुपचाप वापसी” बता रहे हैं। उनका कहना है कि अब जब चुनाव पास हैं और महंगाई बड़ा मुद्दा बन चुकी है, तो सरकार अपनी ही नीति से पीछे हट रही है—यह स्वीकारोक्ति इस तथ्य की है कि आयात शुल्कों ने वास्तव में बाजार पर दबाव बनाया था। वॉशिंगटन पोस्ट और रॉयटर्स की रिपोर्टों के अनुसार यह फैसला ट्रम्प प्रशासन के आर्थिक रवैये में एक गहरे परिवर्तन का संकेत है, क्योंकि राष्ट्रपति अब कह रहे हैं कि टैरिफ हटाने से मिलने वाले राजस्व-घाटे की भरपाई वे अगले वर्ष “निचले और मध्यम आय वर्ग के अमेरिकियों को 2,000 डॉलर की राहत राशि” देकर करेंगे।
कुल मिलाकर यह फैसला अमेरिकी घरेलू राजनीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उपभोक्ता अर्थव्यवस्था—तीनों दृष्टियों से एक बड़ा मोड़ है। बढ़ती खाद्य महंगाई के बीच यह कदम तात्कालिक राहत तो देगा ही, साथ ही आने वाले समय में यह वैश्विक व्यापार-नीतियों और अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।




