हनुमान मिश्रा | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026
महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है और इसे विशेष रूप से रात्रि पूजा और जागरण का महापर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव अत्यंत कृपालु होते हैं और सच्चे मन से की गई पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि को सामान्य व्रत-पर्वों से अलग और अत्यंत फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग की विशेष पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मा और विष्णु के अहंकार का नाश करते हैं और यह संदेश देते हैं कि सत्य, संयम और तप ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी स्मृति में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि की पूजा रात में चार प्रहरों में की जाती है। भक्त पूरी रात जागकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल चढ़ाने का विशेष महत्व है। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। माना जाता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसके बिना शिव-पूजा अधूरी मानी जाती है।
इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार के साथ उपवास करते हैं। व्रत का उद्देश्य केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन और विचारों की शुद्धि भी है। शिव को वैराग्य, तपस्या और करुणा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन अहंकार, क्रोध और छल-कपट से दूर रहने की सीख दी जाती है।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व भी गहरा है। कहा जाता है कि यह रात साधना और ध्यान के लिए विशेष होती है। योग और तंत्र की परंपरा में महाशिवरात्रि को चेतना के उच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर माना गया है। यही वजह है कि कई साधु-संत और शिव-भक्त इस रात विशेष साधना करते हैं और मौन व ध्यान में लीन रहते हैं।
देश भर के शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि पर विशेष सजावट और पूजा-अर्चना की जाती है। काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, सोमनाथ, बैद्यनाथ और रामेश्वरम जैसे प्रमुख शिवधामों में इस दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिरों में “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर भी है। यह पर्व याद दिलाता है कि शिव केवल देवता नहीं, बल्कि जीवन दर्शन हैं—संयम, सरलता और संतुलन का प्रतीक। मान्यता है कि इस रात की गई सच्ची पूजा से शिव भक्तों को भय, रोग और दुःख से मुक्ति देते हैं और जीवन में शांति व स्थिरता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इसी आस्था और विश्वास के साथ देशभर में श्रद्धालु 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाने की तैयारी में जुटे हैं, ताकि भोलेनाथ की कृपा से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।




