तिरुवनंतपुरम | विशेष संवाददाता
केरल की 10 महीने की मासूम आलिन शेरिन अब्राहम ने अपने छोटे से जीवन में ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है। एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे तिरुवनंतपुरम के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद जब विशेषज्ञों के पैनल ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया, तब उसके माता-पिता के सामने जीवन का सबसे कठिन निर्णय खड़ा था।
परिवार ने गहरे शोक के बीच अंगदान की अनुमति देने का फैसला किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बच्ची के अंगों को राज्य की अंग प्रत्यारोपण समन्वय प्रणाली के तहत जरूरतमंद मरीजों को आवंटित किया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उसके अंगों से चार गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जीवनदान मिला। इनमें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती वे बच्चे शामिल थे, जो लंबे समय से प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में थे और जिनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।
डॉक्टरों का कहना है कि इतनी कम उम्र में अंगदान के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं और इसके लिए विशेष चिकित्सा तैयारी तथा विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता होती है। प्रत्यारोपण प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि अंगों की गुणवत्ता सुरक्षित रहे और जरूरतमंद बच्चों को तुरंत लाभ मिल सके। अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि यह केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि भावनात्मक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील क्षण था—एक परिवार का असहनीय दुख, दूसरे परिवारों के लिए उम्मीद बन रहा था।
राज्य सरकार ने आलिन शेरिन अब्राहम को सम्मान देते हुए राजकीय गरिमा के साथ अंतिम विदाई दी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सा कर्मियों और आम नागरिकों ने मौन श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उपस्थित लोगों ने माता-पिता के साहस और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
केरल पहले से ही देश में अंगदान के प्रति जागरूकता और समन्वित प्रणाली के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन 10 महीने की बच्ची का यह मामला राज्य के इतिहास में सबसे कम उम्र के अंगदाता के रूप में दर्ज हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच को बल मिलेगा और अधिक लोग इस दिशा में आगे आएंगे।
आलिन शेरिन अब्राहम अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका नाम उन चार परिवारों की दुआओं में हमेशा जिंदा रहेगा, जिनके बच्चों को नई जिंदगी मिली। शोक और संवेदना के बीच यह घटना यह भी याद दिलाती है कि इंसानियत का सबसे बड़ा परिचय वही है, जब आदमी अपने निजी दर्द से ऊपर उठकर दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन जाए।




