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UAE की राजनयिक हिंद अल-ओवैस और जेफरी एपस्टीन के बीच लीक हुए ईमेल्स ने मानवाधिकारों पर उठाए सवाल

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एबीसी नेशनल न्यूज | वाशिंगटन | 13 फरवरी 2026

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए तथाकथित “एपस्टीन फाइल्स” ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। जारी दस्तावेजों में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजनयिक Hind Al-Owais और अमेरिकी वित्तीय कारोबारी व दोषी ठहराए गए यौन अपराधी Jeffrey Epstein के बीच वर्ष 2011 और 2012 के दौरान सैकड़ों ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। इन ईमेल्स में सामाजिक मुलाकातों, कार्यक्रमों और “लड़कियों की व्यवस्था” जैसे शब्दों के उल्लेख ने वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 469 ईमेल्स के आदान-प्रदान का उल्लेख किया गया है। जनवरी 2012 के एक ईमेल में कथित तौर पर “दो लड़कियों की व्यवस्था” को चुनौती बताया गया, जबकि जवाब में मिलने का समय तय करने की बात कही गई। हालांकि इन संवादों में जिन “लड़कियों” का जिक्र है, उनकी उम्र, पहचान या संदर्भ के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद, एपस्टीन के आपराधिक इतिहास को देखते हुए इन संदेशों को लेकर संदेह और आलोचना तेज हो गई है।

ज्ञात हो कि जेफरी एपस्टीन को नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। 2019 में गिरफ्तारी के बाद वह न्यूयॉर्क की जेल में मृत पाए गए थे। उनके व्यापक संपर्कों में राजनीतिक, व्यावसायिक और कूटनीतिक जगत की कई हस्तियों के नाम समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं, हालांकि हर मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

हिंद अल-ओवैस वर्तमान में यूएई की एक स्थायी मानवाधिकार समिति से जुड़ी वरिष्ठ पदाधिकारी मानी जाती हैं और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भी सलाहकार की भूमिका निभाई है। ऐसे में इन लीक संदेशों ने न केवल उनकी व्यक्तिगत विश्वसनीयता बल्कि यूएई की मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। हालांकि यूएई सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिया गया है कि एपस्टीन अपने नेटवर्क का उपयोग राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के लिए करते थे। हालांकि इज़रायल, कतर या अन्य देशों से जुड़े दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और कई आरोप अभी अप्रमाणित हैं।

यह प्रकरण इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि मानवाधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और मानव तस्करी जैसे मुद्दे वैश्विक विमर्श के केंद्र में हैं। ऐसे में यदि किसी मानवाधिकार पदाधिकारी का नाम अतीत में ऐसे विवादित व्यक्ति से जुड़ा सामने आता है, तो नैतिकता, जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस स्वाभाविक रूप से तेज हो जाती है।

फिलहाल इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से एपस्टीन नेटवर्क को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। संबंधित पक्षों पर किसी नए आपराधिक आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।

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