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खड़गे : देश की एकता के लिए आरएसएस पर बैन ज़रूरी

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर बैन लगाने की खुली मांग कर एक बड़ा राजनीतिक तूफ़ान खड़ा कर दिया है। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में पटेल जी के विचारों का सम्मान करते हैं, तो उन्हें आरएसएस पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने कहा — “मेरी व्यक्तिगत राय है कि आरएसएस पर बैन लग जाना चाहिए। यह संगठन देश में नफरत फैलाता है, और सारी कानून-व्यवस्था की समस्याओं की जड़ भाजपा और आरएसएस हैं।”

अगर मोदी पटेल का सम्मान करते हैं, तो आरएसएस पर लगाएं रोक

खड़गे ने अपने बयान में सीधा सवाल उठाया कि जब सरदार पटेल ने खुद 1948 में आरएसएस पर बैन लगाया था, तब मोदी सरकार आज उस संगठन को खुले तौर पर संरक्षण क्यों दे रही है? उन्होंने कहा कि आज वही लोग पटेल के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, जिन्होंने गांधी जी की हत्या के माहौल को जन्म दिया था। “सरदार पटेल ने RSS और हिंदू महासभा की गतिविधियों को गांधी हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था — यह ऐतिहासिक तथ्य है। मोदी सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और उसी संगठन को सरकारी संस्थाओं में जगह दे रही है, जिसे पटेल ने खतरनाक बताया था।”न

सरदार पटेल का ऐतिहासिक पत्र और आरएसएस की भूमिका

खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरदार पटेल द्वारा 4 फरवरी 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए पत्र का ज़िक्र किया। उस पत्र में पटेल ने कहा था कि गांधी जी की हत्या के बाद आरएसएस ने मिठाइयां बांटीं और हर्ष मनाया — जिसके कारण सरकार को मजबूरन उस पर बैन लगाना पड़ा। पटेल ने लिखा था कि आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों के चलते ऐसा विषैला वातावरण बना, जिससे गांधी जी की हत्या हुई। खड़गे ने कहा कि इस पत्र को जानबूझकर भाजपा और उसके समर्थक इतिहास से गायब करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि नई पीढ़ी सच्चाई से अनजान रहे।

कर्नाटक विवाद और प्रियंक खड़गे की कार्रवाई

खड़गे का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में आरएसएस की गतिविधियों को लेकर विवाद तेज है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की सरकार में मंत्री और खड़गे के पुत्र प्रियंक खड़गे ने 4 अक्टूबर 2025 को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों में आरएसएस की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। प्रियंक ने आरोप लगाया था कि आरएसएस युवाओं के मन में संविधान-विरोधी विचार भर रही है और बिना अनुमति हथियारनुमा लाठियां लेकर मार्च निकाल रही है, जिससे समाज में डर और विभाजन का माहौल बनता है। बाद में 16 अक्टूबर को उन्होंने आरएसएस कार्यक्रमों में शामिल होने वाले सरकारी अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर चेतावनी दी कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

बीजेपी का पलटवार — घृणा फैलाने वाला बयान

बीजेपी ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान को “घृणा और विभाजन फैलाने वाला” करार दिया। पार्टी प्रवक्ता सी.आर. केसवान ने कहा कि आरएसएस राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला संगठन है और कांग्रेस दशकों से पटेल के योगदान को नज़रअंदाज़ करती रही है। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें 2002 में खड़गे आरएसएस के एक कार्यक्रम में दिखे थे। इस पर प्रियंक खड़गे ने जवाब दिया कि “वो कार्यक्रम शांति समिति की बैठक के बाद चेतावनी देने के लिए था, न कि आरएसएस के समर्थन में।”

राजनीतिक महत्व — “व्यक्तिगत राय” या कांग्रेस की आधिकारिक लाइन?

हालांकि खड़गे ने इसे अपनी “व्यक्तिगत राय” बताया, लेकिन उनके बयान को कांग्रेस की विचारधारा और राजनीतिक रुख के अनुरूप माना जा रहा है। पार्टी ने पहले भी आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और गांधी जी की हत्या में उसके वैचारिक प्रभाव का मुद्दा बार-बार उठाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के चुनावी परिदृश्य में यह बयान कांग्रेस की “ध्रुवीकरण विरोधी राजनीति” की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा सकता है। यह संदेश देने की कोशिश है कि कांग्रेस आज भी सेक्युलरिज़्म, संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में खड़ी है — जबकि भाजपा-आरएसएस की राजनीति देश को सांप्रदायिक दिशा में ले जा रही है।

 आरएसएस पर बैन की बहस फिर गरम

खड़गे के इस बयान ने दशकों पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है कि क्या आरएसएस जैसी विचारधारात्मक संस्थाओं को राजनीतिक शक्ति का संरक्षण मिलना लोकतंत्र के लिए खतरा है? सरदार पटेल के ऐतिहासिक बैन से लेकर मोदी सरकार की वर्तमान नीतियों तक, सवाल वही है — क्या देश की एकता और संविधान की रक्षा के लिए इस संगठन पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए? खड़गे का बयान स्पष्ट है: “अगर देश को बचाना है, तो नफरत फैलाने वालों पर रोक लगानी होगी।”

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