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जूनियर महिला हॉकी टीम के कोच पर यौन शोषण का आरोप—खेल मंत्रालय ने जांच बैठाई

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संजीव कुमार | मुंबई 21 नवंबर 2028

भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम के लिए यह समय चुनौतियों से भरा हुआ है क्योंकि विज्ञापन के बाद एक अति-गंभीर आरोप सामने आया है। Ministry of Youth Affairs and Sports (खेल मंत्रालय) ने हाल ही में आदेश दिया है कि टीम के कोच के खिलाफ यौन-शोषण के आरोपों की तत्काल जाँच की जाए। इस आदेश के साथ यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत आरोप का नहीं रह गया बल्कि राष्ट्रीय-स्तर की संवेदनशील घटना बन गया है, जिससे भारतीय हॉकी-परिवार और खेल व्यवस्था दोनों मान-दंडों पर सवालों से जूझ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह आरोप जूनियर महिला हॉकी टीम की एक विदेशी दौरे के दौरान उठे हैं, जब टीम ने अर्जेंटीना, बेल्जियम व नीदरलैंड्स तथा ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। उस दौरान टीम में शामिल एक सदस्य के कथित रूप से कोच के कमरे में नियमित रूप से आने-जाने की सूचना मिली थी, जिसे टीम व संगठन में गंभीर चिंता के रूप में देखा गया। इस खबर ने एक खामोश व्यवस्था-घटना को उजागर कर दिया है — जहां खेल-उच्चतम स्तर के माहौल में भी टीमें और खिलाड़ी असुरक्षा, दबाव और जोखिम में हो सकते हैं।

खेल मंत्रालय ने इस मामले में कहा कि उन्होंने तुरंत सूचना मिलने पर मामले को संज्ञान में लिया है और विस्तृत जांच के लिए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय का बयान था: “यह मामला बेहद गंभीर है; हमने पूछताछ शुरू कर दी है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।” हालांकि, अभी तक किसने शिकायत की है, कोच का नाम क्या है, या खिलाड़ी की पहचान क्या है — इन सभी पर कानूनी नियमों के तहत गोपनीयता है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने तक टीम के कोच-सहायता स्टाफ को अस्थायी रूप से हटाने का विकल्प भी खुला है, ताकि टीम की प्रतिष्ठा और खिलाड़ियों की सुरक्षा बनी रहे।

इस पूरे मामले ने भारतीय हॉकी व्यवस्था तथा जूनियर स्तर की खिलाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से यह तथ्य कि शिकायत आधिकारिक रूप से “कोच-की कमरे में आने-जाने” के आधार पर उठी है, यह चिंताजनक है क्योंकि यह संकेत देता है कि युवा खिलाड़ी-खेल संस्था के बीच शक्ति-संतुलन का दुष्प्रभाव हो सकता है। साथ ही, यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि टीम प्रबंधन, हॉकी इंडिया और राज्य/राष्ट्रीय हॉकी संघों को अपनी आचार-संहिता, शिकायत निवारण तंत्र और खिलाड़ी-लिखित सुरक्षा उपायों को कड़ा करने की जरूरत है।

अगले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे: जांचकर्ता हॉकी इंडिया, मंत्रालय और संबंधित राज्य हॉकी संघों के बीच समन्वय कर रहे हैं; टीम के आगामी टूर्नामेंट से पहले इस विवाद को सुलझाने का प्रेशर बढ़ गया है क्योंकि जूनियर महिला टीम जल्द ही आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो कोच को तुरंत निलंबित करने के साथ-साथ अन्य सहायक स्टाफ पर भी कार्रवाई हो सकती है — इससे यह भी स्पष्ट होगा कि खेल- व्यवस्था में सुरक्षा केवल जमीनी शब्दों में नहीं बल्कि वास्तविक व्यवहार-प्रणाली में लागू हो रही है।

इस प्रकार, यह मामला केवल एक कोच-विरोधी आरोप का नहीं है बल्कि पूरे भारतीय महिला हॉकी-सेक्टर के लिए चेतावनी-सदृश है कि जहाँ तक उच्च-स्तर की प्रतियोगिताएँ और विदेशी दौरे हैं, वहाँ खिलाड़ियों की सुरक्षा, निजता व सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अब यह देखने की बारी है कि जांच कितनी पारदर्शी, कितनी निष्पक्ष और कितनी समयबद्ध होती है — क्योंकि हर युवा खिलाड़ी को भरोसा किया जाना चाहिए कि मैदान सिर्फ मेहनत का स्थल है, भय का नहीं।

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