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ISS में फिर तकनीकी संकट, NASA ने अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित कैप्सूल में भेजा

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | काव्या अग्रवाल | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 6 जून 2026

रूसी मॉड्यूल में नए रिसाव की आशंका

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक बार फिर तकनीकी चुनौती सामने आई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने स्टेशन में नए रिसाव (लीक) का पता चलने के बाद एहतियातन अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश दिया। इस घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद पांच अंतरिक्ष यात्रियों को तत्काल स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में शरण लेने के लिए कहा गया, जबकि रूसी अंतरिक्ष यात्री और तकनीकी विशेषज्ञ रिसाव के स्रोत का पता लगाने और उसे नियंत्रित करने में जुट गए।

नासा के अनुसार यह कदम पूरी तरह सावधानी के तौर पर उठाया गया है। एजेंसी का कहना है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित जोखिम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह रिसाव अंतरिक्ष स्टेशन के रूसी हिस्से में दर्ज किया गया है। जैसे ही सेंसरों ने असामान्य स्थिति का संकेत दिया, मिशन कंट्रोल ने तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए और सभी आवश्यक कदम उठाए गए।

अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा कर रहा है और वहां मौजूद प्रत्येक तकनीकी प्रणाली का सही तरीके से काम करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अंतरिक्ष में हवा का दबाव बनाए रखना जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है। किसी भी प्रकार का रिसाव यदि समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। यही कारण है कि नासा और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने बिना किसी देरी के सुरक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी।

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सूत्रों के अनुसार पांचों अंतरिक्ष यात्रियों को स्टेशन से जुड़े स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल में भेजा गया ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत पृथ्वी पर वापस लाया जा सके। यह अंतरिक्ष मिशनों में अपनाई जाने वाली मानक आपातकालीन प्रक्रिया का हिस्सा है। ड्रैगन कैप्सूल हमेशा इस प्रकार की परिस्थितियों के लिए तैयार रखा जाता है ताकि किसी बड़ी तकनीकी समस्या की स्थिति में चालक दल को सुरक्षित निकाला जा सके।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बार छोटे-मोटे रिसाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेष रूप से रूसी मॉड्यूल में तकनीकी खामियों और सूक्ष्म दरारों को लेकर पहले भी चिंताएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि अधिकांश मामलों में इंजीनियरों ने समय रहते समस्या का समाधान कर लिया था और किसी भी अंतरिक्ष यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा था। इस बार भी शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन विशेषज्ञ पूरी सतर्कता के साथ निगरानी कर रहे हैं।

नासा के प्रवक्ता ने कहा कि “अत्यधिक सावधानी बरतते हुए” यह निर्णय लिया गया है। एजेंसी लगातार स्टेशन की सभी प्रणालियों पर नजर रखे हुए है और अंतरिक्ष यात्रियों की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। रूसी तकनीकी दल रिसाव के सटीक स्थान की पहचान करने और उसे बंद करने का प्रयास कर रहा है। फिलहाल स्टेशन के संचालन पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की सूचना नहीं है।

अंतरिक्ष विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अब दो दशक से अधिक पुराना हो चुका है और उसकी कई प्रणालियां उम्र के प्रभाव का सामना कर रही हैं। यही कारण है कि नियमित रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आने वाले वर्षों में अमेरिका, रूस और अन्य साझेदार देशों द्वारा स्टेशन के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने हैं। इस प्रकार की घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव उपस्थिति बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है।

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दुनिया भर की निगाहें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर टिकी हुई हैं। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उम्मीद है कि रिसाव की समस्या जल्द ही नियंत्रित कर ली जाएगी और स्टेशन सामान्य रूप से काम करता रहेगा। नासा ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसे सार्वजनिक किया जाएगा।

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