अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | दुबई | 2 जून 2026
मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदों को झटका, युद्ध और व्यापक होने की आशंका
मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच शांति प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं और संदेशों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ईरान का आरोप है कि लेबनान में इज़राइल द्वारा किए जा रहे लगातार सैन्य हमले और युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन इस निर्णय का प्रमुख कारण हैं। इस कदम के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है तथा युद्ध के और अधिक देशों तक फैलने का खतरा गहरा गया है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती और युद्धविराम की शर्तों का सम्मान नहीं किया जाता, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। ईरानी वार्ताकारों का मानना है कि लेबनान की स्थिति युद्धविराम समझौते की महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल थी, लेकिन इज़राइल की सैन्य कार्रवाई ने पूरे समझौते की बुनियाद को कमजोर कर दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ सप्ताह से अमेरिका, ईरान, इज़राइल और लेबनान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नए समझौते पर काम कर रहा था और दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद जारी था। लेकिन लेबनान में इज़राइल के बढ़ते सैन्य अभियानों ने इन प्रयासों को गंभीर झटका पहुंचाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का यह फैसला केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है। तेहरान यह दिखाना चाहता है कि वह अपने सहयोगी समूहों और क्षेत्रीय हितों को नजरअंदाज कर किसी भी समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा। विशेष रूप से लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह और यमन के हूती विद्रोही ईरान के प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगी माने जाते हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यमन के हूती विद्रोही भी इस संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं तो लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच भारी मात्रा में तेल और व्यापारिक सामान का आवागमन होता है। किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इज़राइल और लेबनान के बीच हाल के दिनों में संघर्ष तेज हुआ है। इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है, जबकि हिज्बुल्लाह लगातार जवाबी हमले कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है और पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट की आशंका बढ़ गई है।
उधर अमेरिका लगातार यह दावा कर रहा है कि वह क्षेत्र में स्थिरता और युद्धविराम स्थापित करने के लिए प्रयासरत है, लेकिन ईरान का ताजा निर्णय इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक रास्ता अब और कठिन हो गया है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद पूरी तरह टूट जाता है तो पश्चिम एशिया में पहले से जारी युद्ध और अधिक जटिल तथा खतरनाक रूप ले सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान को दोबारा वार्ता की मेज पर लाने में सफल होंगे या फिर मध्य-पूर्व एक और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के इस फैसले ने युद्ध समाप्ति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है और पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता तथा तनाव का माहौल और गहरा गया है।




