न्यूयॉर्क 28 सितंबर 2025
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक सशक्त, स्पष्ट और आत्मविश्वासी संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है। जयशंकर का बयान केवल औपचारिक भाषण नहीं था — यह एक राष्ट्र की प्रतिबद्धता का ऐलान था। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर कायम है और किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
शून्य सहनशीलता का ऐलान — आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख
जयशंकर ने कहा कि भारत अपने घर और विदेश दोनों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित है। यह वक्तव्य केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी था कि आतंकवाद को अब किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने हाल के पाहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, और बताया कि भारत ने इस हमले के अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए उसे “वैश्विक आतंकवाद का महाकेंद्र” कहा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वैश्विक सहयोग की अपील — शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कदम
जयशंकर ने दुनिया के नेताओं को याद दिलाया कि आज की चुनौतियाँ सीमाओं से परे हैं — चाहे वह आतंकवाद हो, कट्टरपंथ, जलवायु संकट या आर्थिक असमानता। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ बनने के लिए प्रतिबद्ध है और उन देशों के हितों को आगे बढ़ाएगा जो विकास और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका संदेश था कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अधिक उत्तरदायी और प्रतिनिधिक होना चाहिए ताकि दुनिया के सभी हिस्सों की आवाज सुनी जा सके।
संप्रभुता की रक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान
जयशंकर का भाषण एक कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे था — यह भारत की नीति का स्पष्ट रोडमैप था। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत केवल प्रतिक्रियावादी नहीं है बल्कि सक्रिय रूप से न्याय, शांति और सहयोग की दिशा में नेतृत्व करेगा।
भारत का आत्मविश्वास और बढ़ती जिम्मेदारी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में जयशंकर का वक्तव्य इस बात का प्रतीक है कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं रहा, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाने को तैयार है। भारत की आवाज अब विश्व मंच पर और बुलंद हो रही है — चाहे वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो, जलवायु परिवर्तन पर ठोस पहल हो या वैश्विक शांति की दिशा में प्रयास। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत किस तरह अपनी कूटनीतिक नीतियों को ज़मीनी हकीकत में बदलता है।




