पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर गहरे संकट में फँस गई है, और इस बार विवाद का केन्द्र केवल सत्ता संघर्ष या चुनावी धांधली नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ज़िंदगी और सुरक्षा का सवाल बन गया है। इमरान खान के बेटे कासिम खान ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए दावा किया है कि अदियाला जेल में उनके पिता की हालत के बारे में कोई भी विश्वसनीय सूचना उपलब्ध नहीं है, और परिवार को पिछले कई दिनों से न तो मुलाक़ात की अनुमति दी गई है और न ही किसी प्रकार का प्रमाण कि इमरान खान “ज़िंदा और सुरक्षित” हैं। कासिम ने कहा कि यह स्थिति अब सामान्य कानूनी प्रक्रिया से कहीं आगे बढ़कर “पूरी तरह ब्लैकआउट” में बदल चुकी है — ऐसा ब्लैकआउट जिससे पूरा परिवार, समर्थक और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन स्तब्ध हैं।
इमरान खान पिछले साल से राजनीतिक मामलों, भ्रष्टाचार मामलों और सैन्य-न्यायिक संरचना से टकराव के चलते जेल में बंद हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि वर्तमान हालात पहले कभी इतने भयावह नहीं थे। कासिम खान ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन, पंजाब सरकार और संघीय अधिकारियों—सभी ने ऐसी “अस्पष्ट और संदिग्ध चुप्पी” साध ली है जो किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में अकल्पनीय है। उनका कहना है, “हमें नहीं पता कि वह कैसे हैं, कहाँ हैं, क्या वह खाना खा रहे हैं, क्या वह बीमार हैं, क्या उन्हें दवा मिल रही है—कुछ भी नहीं। यह सिर्फ कैद नहीं, यह संचार का निर्मम शून्य है। यह ऐसा नियंत्रण है कि हम अपने पिता के ज़िंदा होने का भी सबूत नहीं मांग पा रहे।”
जेल में ‘पूर्ण अंधेरा’ वाली स्थितियों को लेकर कासिम के बयान ने पाकिस्तान के अंदर और बाहर दोनों ही जगह चिंता को चरम पर पहुँचा दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की गिरफ्तारी का मामला नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिशोध, मौन दमन, और व्यवस्था द्वारा विरोधी को समाप्त कर देने का मॉडल बनता जा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी पाकिस्तान में हालिया महीनों में न्यायिक प्रक्रियाओं, मीडिया प्रतिबंधों, इंटरनेट ब्लैकआउट और विपक्षी नेताओं पर कठोर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। इमरान खान को जेल में विशेष दर्जा देने की मांग बार-बार उठी है, लेकिन परिवार के अनुसार सरकार ने इन मांगों को “कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया”—और अब हालात ऐसे हैं कि परिवार को यह भी नहीं पता कि उनके पिता तक कौन जाता है और कौन नहीं।
इमरान खान के कानूनी सलाहकारों ने भी अदालत में यह मुद्दा उठाया है कि पिछले दो हफ्तों में न तो उन्हें उचित कानूनी पहुँच दी गई है, न ही उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट साझा की गई है। वकीलों का कहना है कि जेल में अचानक सुरक्षा बढ़ा दी गई है, मुलाक़ात पर रोक लगा दी गई है और CCTV विज़िट लॉग भी साझा नहीं किए जा रहे—जो इस पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बनाता है। कई रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि जेल प्रशासन ने ‘उच्च सुरक्षा प्रोटोकॉल’ का हवाला देकर खान की हालिया बैठकों को रद्द कर दिया, लेकिन परिवार को इस निर्णय के पीछे का कारण नहीं बताया गया।
कासिम खान ने यह भी कहा कि, “हम यह नहीं कह रहे कि जेल कोई पाँच सितारा रिसॉर्ट बने। लेकिन दुनिया में कोई भी जेल ऐसा नहीं है जहाँ कैदी के जीवित होने तक की जानकारी परिवार से छिपाई जाए। यह क्रूरता है, यह शक्ति का दुरुपयोग है, और यह पाकिस्तान की छवि को दुनिया के सामने खून से लिखी चेतावनी बना देता है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की अपील की है, यह कहते हुए कि वर्तमान हालात “एक राजनीतिक विरोधी को खत्म कर देने की तैयारी” जैसी है।
इमरान खान की गिरफ्तारी शुरू से ही पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान और सरकार की संयुक्त कार्यवाही मानी गई है, लेकिन कभी भी स्थिति इतनी गंभीर नहीं हुई कि परिवार को यह भी न पता चले कि वह सुरक्षित हैं या नहीं। यही कारण है कि कासिम के बयान ने सोशल मीडिया पर उबाल भड़का दिया है—हैशटैग #WhereIsImranKhan पाकिस्तान, यूके, कतर और यूएस में ट्रेंड कर रहा है। कई टिप्पणीकारों ने इसे “21वीं सदी में लोकतंत्र के नाम पर सबसे खतरनाक चुप्पी” कहा है।
अगर पाकिस्तान सरकार और जेल प्रशासन इस ‘पूर्ण अंधकार’ को जारी रखते हैं, तो यह न सिर्फ इमरान खान की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, बल्कि पाकिस्तान की न्यायिक विश्वसनीयता, शासन ढाँचे, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गहरी चोट पहुँचाता है। दुनिया अब सवाल पूछ रही है—क्या पाकिस्तान अपने एक पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा का भी प्रमाण देने से इंकार कर सकता है? और अगर हाँ, तो फिर वहाँ की राजनीतिक व्यवस्था कितनी सुरक्षित और कितनी लोकतांत्रिक बची है?





