अंतरराष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने भारत की राजनीति में भी तीखी बहस छेड़ दी है। आरजेडी प्रवक्ता Priyanka Bharti ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance इस हफ्ते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf से मुलाकात कर सकते हैं। इस संभावित बैठक में अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल हो सकते हैं। पाकिस्तान खुद को इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है। वहीं, पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir द्वारा Donald Trump से बातचीत कर इस्लामाबाद को वार्ता स्थल बनाने की पेशकश की खबरें भी चर्चा में हैं।
आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जो देश खुद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सहारे चल रहा है, वही आज वैश्विक शांति वार्ता की मेजबानी की बात कर रहा है।” उन्होंने केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारत को ऐसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों से दूर कर दिया गया है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान इस समय IMF के लगभग 7 बिलियन डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम पर निर्भर है और उसकी अर्थव्यवस्था दबाव में है। इसके बावजूद, इस तरह की कूटनीतिक सक्रियता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्ट्स को अभी “स्पेकुलेटिव” और “फ्लूइड” बताया है, यानी इस तरह की किसी बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की तरफ से लगातार संकेत दिए जा रहे हैं कि वह अमेरिका-ईरान तनाव को कम करने में भूमिका निभाना चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। विपक्ष जहां इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति की कमजोरी बता रहा है, वहीं सरकार के समर्थक इन दावों को अतिरंजित और अपुष्ट बता रहे हैं। असली सवाल यही है—क्या पाकिस्तान वाकई इस बड़े वैश्विक संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा पाएगा, या यह सिर्फ कूटनीतिक छवि सुधारने की कोशिश है? और उससे भी बड़ा सवाल, क्या भारत इस पूरे समीकरण में अपनी जगह फिर से मजबूत कर पाएगा या नहीं?




