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मैं जनरल नरवणे पर भरोसा करता हूं, न कि पेंगुइन पर—सरकार सच्चाई छिपा रही है: राहुल गांधी

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026

संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने आज राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी। पूर्व थलसेना प्रमुख Manoj Naravane की किताब को लेकर उठे विवाद पर राहुल गांधी ने सरकार पर सच्चाई छिपाने का सीधा आरोप लगाया और कहा कि यह सिर्फ किताब का मामला नहीं, बल्कि देश के सामने सच रखने या उसे दबाने का सवाल है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या फिर पब्लिशर पेंगुइन और उसके जरिए भारत सरकार देश को गुमराह कर रही है। इसी दावे के आधार पर राहुल गांधी ने कहा कि वह जनरल नरवणे पर भरोसा करते हैं, न कि पेंगुइन पर—और यही वजह है कि सरकार असहज हो गई है।

राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जनरल नरवणे ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी किताब को लेकर पोस्ट किया था और लोगों से उसे खरीदने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “यह जनरल नरवणे का ट्वीट है, जिसमें वह लिखते हैं—‘मेरी किताब के लिए लिंक फॉलो करें।’ 2023 में उन्होंने साफ कहा था—‘प्लीज़ मेरी किताब खरीदिए।’ अब अगर पेंगुइन कहता है कि किताब पब्लिश ही नहीं हुई, तो फिर यह ट्वीट क्या था? और अगर किताब अमेज़न पर उपलब्ध दिख रही है, तो सरकार और पब्लिशर यह क्यों कह रहे हैं कि किताब छपी ही नहीं?” राहुल गांधी ने सवाल किया कि देश किस पर भरोसा करे—एक पूर्व सेना प्रमुख पर या पब्लिशर के बदले हुए बयानों पर।

उन्होंने दो टूक कहा, “मैं जनरल नरवणे पर भरोसा करता हूं। एक पूर्व आर्मी चीफ के बारे में मैं यह मानने को तैयार नहीं कि वह झूठ बोलेंगे। अब देश को तय करना है कि वह पेंगुइन पर भरोसा करेगा या जनरल नरवणे पर।” राहुल गांधी के मुताबिक, सरकार इस सवाल से बचना चाहती है कि आखिर किताब में ऐसा क्या लिखा है, जिससे सत्ता को इतनी परेशानी हो रही है।

किताब में लिखी बातें सरकार को असहज कर रही हैं

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में ऐसी बातें लिखी हैं, जो मौजूदा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए असुविधाजनक हैं। यही वजह है कि अब किताब के छपने, न छपने और उपलब्ध होने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा, “अगर किताब में कुछ गलत है, तो सरकार सामने आकर तथ्यों से उसका खंडन क्यों नहीं करती? किताब पर बहस क्यों नहीं होती? सरकार तकनीकी बहानों के पीछे क्यों छिप रही है?”

उनका कहना था कि लोकतंत्र में सवालों का जवाब दिया जाता है, लेकिन यहां सवाल उठते ही या तो सदन ठप कर दिया जाता है या फिर ध्यान भटकाने की कोशिश होती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला सरकार की घबराहट को उजागर करता है।

अमेरिका ट्रेड डील पर भी सरकार को घेरा

इसी बातचीत में राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक डील को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक पोस्टर दिखाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को समझने के लिए किसी बड़े अर्थशास्त्री होने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया, “सच्चाई यह है कि नरेंद्र मोदी ने Donald Trump के सामने सरेंडर कर दिया है।”

उनका कहना था कि इस डील का असर सीधे तौर पर देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों पर पड़ेगा, लेकिन सरकार इस पर खुली बहस से बच रही है। “जब हम सवाल उठाते हैं, तो संसद चलने नहीं दी जाती, हमें बोलने नहीं दिया जाता और अब किताबों से भी डर लगने लगा है,” राहुल गांधी ने कहा।

‘सच से भागती सरकार’ का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि नरवणे की किताब, अमेरिका ट्रेड डील और संसद में बोलने से रोके जाने—ये सभी घटनाएं एक ही कहानी कहती हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार सच का सामना करने से डरती है। “अगर सरकार ईमानदार होती, तो वह संसद में बहस करती, सवालों के जवाब देती और तथ्यों के साथ खड़ी होती। लेकिन यहां हर असहज सवाल पर या तो चुप्पी है या फिर दबाव बनाने की कोशिश,” उन्होंने कहा।

उन्होंने अंत में कहा कि देश को अब यह तय करना होगा कि वह किस पर भरोसा करता है—एक पूर्व सेना प्रमुख पर या सत्ता के दबाव में बयान बदलने वाले पब्लिशर और सरकार पर। “लोकतंत्र सवाल पूछने से चलता है, सच छिपाने से नहीं,” राहुल गांधी ने कहा।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। सत्ता पक्ष की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि जनरल नरवणे की किताब और उससे जुड़े सवाल आने वाले दिनों में सरकार के लिए और ज्यादा असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

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