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योगी पर तंज, उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र बनना बंद हो गए क्या — सांसद प्रिया सरोज

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लखनऊ 27 अक्टूबर 2025

लखनऊ। समाजवादी पार्टी की युवा सांसद प्रिया सरोज ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक ऐसा सवाल पूछकर राजनीतिक हलचल मचा दी है, जिसने योगी आदित्यनाथ सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने व्यंग्यपूर्ण अंदाज़ में पूछा — “क्या उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र बनना बंद हो गए हैं?” यह सवाल केवल एक तंज नहीं, बल्कि बीजेपी सरकार की कथित “चयनात्मक कार्रवाई” पर गहरा सवाल भी है। प्रिया सरोज ने कहा कि बुलडोज़र नीति का इस्तेमाल अब न्याय और कानून के बजाय राजनीति और प्रतिशोध का हथियार बन चुका है।

प्रिया सरोज ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश में “बुलडोज़र राज” को कानून-व्यवस्था की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। लेकिन जब गरीब, दलित, पिछड़े या विपक्षी दलों से जुड़े लोग बिना कोर्ट के आदेश के घर से बेघर किए जा रहे हैं, तब यह बुलडोज़र न्याय का नहीं, बल्कि अन्याय का प्रतीक बन गया है। उन्होंने पूछा कि जब सत्ताधारी दल के नेताओं या समर्थकों पर गंभीर आरोप लगते हैं, तब बुलडोज़र क्यों खामोश हो जाता है? क्या तब वह “मरम्मत में” चला जाता है?

सपा सांसद ने आगे कहा कि बीजेपी सरकार ने “बुलडोज़र” को कानून से ऊपर की ताकत बना दिया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा — “अगर किसी मुस्लिम मोहल्ले में झगड़ा हो जाए तो बुलडोज़र तुरंत पहुँच जाता है, लेकिन अगर किसी भाजपा नेता पर भ्रष्टाचार या महिला उत्पीड़न का आरोप लगे तो वही बुलडोज़र दिखाई नहीं देता। क्या बुलडोज़र अब जात और पार्टी देखकर चलता है?” उनके इस बयान पर सदन में हलचल मच गई, जबकि समाजवादी पार्टी के विधायकों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया।

वहीं, बीजेपी की ओर से मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रिया सरोज के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बुलडोज़र केवल अवैध कब्ज़ों और अपराधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है, न कि किसी की जात या धर्म देखकर। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति साफ़ है — “अपराधी चाहे किसी भी पार्टी का हो, बख्शा नहीं जाएगा।” लेकिन सपा की सांसदों और विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा कि यह कथन केवल “कागज़ी नारा” है, ज़मीनी हकीकत कुछ और कहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रिया सरोज का यह सवाल आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र भाजपा के “बुलडोज़र ब्रांड” पर हमला करने की एक सोची-समझी रणनीति है। यूपी में योगी सरकार ने “बुलडोज़र बाबा” की छवि को सख्त प्रशासक के प्रतीक के रूप में स्थापित किया है। लेकिन अब विपक्ष इसे “दमन का प्रतीक” बताकर जनता के बीच एक नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है। खासकर दलित और अल्पसंख्यक वर्ग में इस बयान को लेकर काफी चर्चा है, जहाँ बुलडोज़र कार्रवाई को “राजनीतिक उत्पीड़न” के रूप में देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी प्रिया सरोज का यह सवाल वायरल हो गया है। ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर कई यूज़र्स ने लिखा — “सवाल छोटा है, लेकिन चोट गहरी है।” वहीं कुछ भाजपा समर्थकों ने इसे “लोकप्रियता हासिल करने का नाटक” बताया। लेकिन इतना तय है कि एक युवा सांसद का यह सीधा और तीखा सवाल भाजपा सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर गया है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि प्रिया सरोज धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी की “नई पीढ़ी” का चेहरा बनकर उभर रही हैं। उनकी साफ़ भाषा, तार्किक तर्क और जनहित के मुद्दों पर मुखरता उन्हें सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की अगली टीम में एक प्रभावशाली आवाज़ बना रही है।

 “क्या उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र बनना बंद हो गए?” यह सवाल सिर्फ़ व्यंग्य नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश है — कि अब जनता बुलडोज़र की दिशा नहीं, उसके इरादे पूछ रही है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा निश्चित रूप से भाजपा की कानून-व्यवस्था की राजनीति पर असर डाल सकता है।

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