एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 मार्च 2026
नई दिल्ली से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक आज एक ही आवाज गूंज रही है – चूल्हा ठंडा पड़ा है, बच्चे भूखे रो रहे हैं, मां आंसू पीकर सो रही है, और ब्लैक मार्केट में घरेलू गैस सिलेंडर 5000 से 7000 रुपये तक बिक रहे हैं, जबकि आधिकारिक कीमत सिर्फ 913 रुपये है दिल्ली में! इसी बीच सोशल मीडिया पर 2013 का वो पुराना वीडियो फिर से बम की तरह फट पड़ा है, जिसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मनमोहन सिंह सरकार पर गरजते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनकी आवाज आज भी उतनी ही तेज और गुस्से से भरी लगती है – “गरीब के घर में चूल्हा नहीं जलता… बच्चा रात-रात भर रोता है… मां आंसू पीकर सोती है… और देश के नेताओं को गरीब की परवाह तक नहीं है। आप मरो तो मरो, ये आपका नसीब!” उस समय पूरा देश नारे लगा रहा था – “मनमोहन सिंह इस्तीफा दो!” आज 2026 में वही वीडियो लाखों-करोड़ों बार देखा जा रहा है, क्योंकि अब हालात और भी बदतर हैं – गैस की किल्लत, लंबी कतारें, ब्लैक में सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं, और जनता फिर वही सवाल पूछ रही है – अब कौन मरेगा?
देश के हर कोने से दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। दिल्ली की गलियों में महिलाएं घंटों लाइन में खड़ी रो रही हैं, पंजाब-हरियाणा के गांवों में मजदूर काम छोड़कर गैस के चक्कर में भटक रहे हैं, बंगाल-छत्तीसगढ़ में होटल-ढाबे लकड़ी-कोयले या डीजल पर चल रहे हैं। घरेलू 14.2 किलो का सिलेंडर आधिकारिक तौर पर दिल्ली में 913 रुपये का है (मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद), लेकिन ब्लैक मार्केट में यह 1400 से 2500 रुपये तक, और कई जगहों पर 5000 से 7000 रुपये तक पहुंच गया है। कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर तो और भी महंगे – आधिकारिक 1884 रुपये के आसपास, लेकिन ब्लैक में 3000 से 6000-9000 रुपये तक बिक रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि ऑनलाइन बुकिंग क्रैश हो रही है, एजेंसियां खाली हाथ लौटा रही हैं, और मजबूरन ब्लैक से खरीदना पड़ रहा है। कई परिवार पुराने मिट्टी के चूल्हे, अंगीठी या बुरादा जलाकर गुजारा कर रहे हैं। स्कूलों में मिड-डे मील ठप, अस्पतालों में मरीजों का खाना प्रभावित, छोटे रेस्टोरेंट बंद या वैकल्पिक ईंधन पर। पूरा संकट मिडिल ईस्ट के ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध से शुरू हुआ – होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित, भारत का 50-60% LPG इम्पोर्ट रुक गया। सरकार ने इमरजेंसी में घरेलू रिफाइनरी से प्रोडक्शन 25-30% बढ़ाया, घरेलू को प्राथमिकता दी, कमर्शियल को काटा – लेकिन ग्राउंड पर हकीकत अलग है, ब्लैक मार्केट फल-फूल रहा है।
विपक्ष ने मौके का पूरा फायदा उठाया है। कांग्रेस, सपा, आप, राजद, डीएमके – सभी ने 2013 वाला वीडियो शेयर कर तंज कसा – “मोदी जी ने खुद कहा था कि नेताओं को गरीब की परवाह नहीं, आप मरो तो मरो ये नसीब! आज खुद की सरकार में ब्लैक में 5000-7000 रुपये सिलेंडर क्यों?” सोशल मीडिया पर #ModiOldVideo, #LPGCrisis2026, #ChulhaThanda, #BlackMarketLPG, #MoroToMoro ट्रेंड कर रहे हैं। लोग कमेंट्स में लिख रहे – 2013 में कांग्रेस को गाली, आज खुद पर क्यों लागू नहीं? पुराने वीडियो के साथ आज की रोती महिलाओं, ठंडे चूल्हों और ब्लैक रेट्स की तस्वीरें जोड़कर पोस्ट वायरल हो रहे हैं। जनता का गुस्सा चरम पर – “2013 में मनमोहन को इस्तीफा दो कहा, आज 2026 में चूल्हा ठंडा, ब्लैक में 7000 का सिलेंडर – अब कौन इस्तीफा देगा?”
सरकार का बचाव जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NXT समिट में कहा – “कुछ लोग पैनिक फैला रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। घरेलू सप्लाई प्राथमिकता पर, 2.5 दिन में डिलीवरी, कोई घर ड्राई-आउट नहीं।” पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान दिया – रिफाइनरी से ज्यादा प्रोडक्शन, घरेलू सुरक्षित, पैनिक बुकिंग रोकने के लिए 25-45 दिन गैप, ब्लैक मार्केटिंग पर छापेमारी। कई राज्यों में पुलिस-प्रशासन सक्रिय, लेकिन दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, भोपाल, लखनऊ से रिपोर्ट्स आ रही हैं कि ब्लैक रेट्स 5000-7000 तक पहुंच गए हैं, कतारें लगी हैं, और हकीकत सरकार के दावों से मेल नहीं खा रही। लोग कह रहे – फेक न्यूज नहीं, फेक वादे ज्यादा हैं।
आज लाखों घरों में चूल्हा ठंडा है, बच्चे भूखे, मां रो रही है। जनता इंतजार कर रही है – या तो गैस की सप्लाई सामान्य हो, ब्लैक मार्केट थमे, या वो पुराना गुस्सा, वो पुरानी आवाज फिर जागे और कहे – “ये नसीब नहीं, ये नाकामी है!” गौर से देखिए, सुनिए और समझिए वो पुराना वीडियो… क्योंकि आज वही शब्द हकीकत बन चुके हैं, और ब्लैक में सिलेंडर 5000-7000 तक पहुंच गए हैं!




