Home » National » जापान से जर्मनी तक… अखिलेश का योगी पर तंज: ‘टोक्यो गए, क्योटो क्यों नहीं?’

जापान से जर्मनी तक… अखिलेश का योगी पर तंज: ‘टोक्यो गए, क्योटो क्यों नहीं?’

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ / नई दिल्ली | फरवरी 2026

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की हालिया जापान यात्रा पर तीखा व्यंग्य किया है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश ने लिखा कि “टोक्यो जानेवाले अगर चाहते तो बुलेट ट्रेन पकड़कर क्योटो भी हो आते… ‘प्रधान इच्छा’ की पूर्ति के लिए थोड़ा अनुभव ले आते, लेकिन इस तरह कन्नी काटकर आना अच्छी बात नहीं।”

अखिलेश का यह बयान सीधे वाराणसी के विकास से जुड़ा माना जा रहा है। वाराणसी प्रधानमंत्री Narendra Modi का संसदीय क्षेत्र है और कई साल पहले काशी को ‘क्योटो जैसा’ बनाने की बात कही गई थी। जापान का क्योटो शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास के संतुलन के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। अखिलेश का इशारा था कि अगर मुख्यमंत्री टोक्यो से आगे बढ़कर क्योटो भी जाते तो विरासत संरक्षण और शहरी विकास का मॉडल नज़दीक से देख सकते थे।

‘मनसुख पर्यटन’ और काशी पर सवाल

अखिलेश ने इस दौरे को ‘मनसुख पर्यटन’ करार दिया। उनका कहना था कि विदेश यात्रा सिर्फ समझौते और फोटो तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वहां के मॉडल से सीख लेकर प्रदेश में लागू करने की कोशिश भी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी तंज कसा कि देश के भीतर का राजनीतिक दुराव विदेश जाकर भी निभाया जा रहा है।

काशी में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य हुए हैं, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस दौरान कई पुरानी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। इसी संदर्भ में क्योटो का उदाहरण देकर अखिलेश ने कहा कि वहां आधुनिकता के साथ परंपरा को बचाए रखा गया है।

जर्मनी का जिक्र और ‘साइकिल हाईवे’ पर कटाक्ष

अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश ने जर्मनी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां जाकर ‘साइकिल हाईवे’ देखने की फुर्सत किसी को नहीं मिली। जर्मनी के कई शहरों में तेज़ और सुरक्षित साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देते हैं।

साइकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है, इसलिए यह टिप्पणी राजनीतिक प्रतीक के रूप में भी देखी जा रही है। अखिलेश का संकेत था कि विदेशों में सादगी और पर्यावरण के मॉडल मौजूद हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जाता।

मर्सिडीज म्यूजियम पर भी तंज

अखिलेश ने जर्मनी के स्टुटगार्ट स्थित मर्सिडीज म्यूजियम का भी जिक्र किया। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि कार देखने की अनुमति तो मिल सकती है, लेकिन ‘सीट’ नहीं मिलेगी। यह बयान भी राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है। उनका आशय यह था कि विदेशी मॉडल और लग्जरी चीजों को दिखाने से ज्यादा जरूरी है कि आम जनता के लिए ठोस काम किए जाएं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

अखिलेश यादव का यह पूरा बयान राजनीतिक तंज से भरा है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की विदेश यात्राओं और विकास मॉडल पर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जापान यात्रा, क्योटो का उदाहरण, जर्मनी का साइकिल हाईवे और मर्सिडीज म्यूजियम—इन सबके जरिए अखिलेश ने एक ही बात कहने की कोशिश की है कि विदेश यात्राएं सिर्फ औपचारिक न हों, बल्कि उनसे वास्तविक सीख लेकर प्रदेश के विकास में लागू किया जाए। राजनीति में तंज और प्रतीक अक्सर गहरी बात कह जाते हैं, और इस बार भी बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments