एबीसी डेस्क 15 दिसंबर 2025
क्या जनसूराज पार्टी के सूत्रधार और देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब कांग्रेस की राजनीति में औपचारिक एंट्री की ओर बढ़ रहे हैं? यह सवाल इन दिनों राजनीतिक गलियारों में तेजी से गूंज रहा है। वजह है—प्रशांत किशोर और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी के बीच हाल ही में हुई मुलाकात, जिसे साधारण शिष्टाचार या औपचारिक भेंट से कहीं आगे का संकेत माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म है और इसे आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक उलटफेर की संभावित भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि प्रशांत किशोर लंबे समय तक कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे हैं। वे सार्वजनिक मंचों से कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और चुनावी रणनीति पर तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा था कि मौजूदा ढांचे के साथ कांग्रेस का पुनरुत्थान आसान नहीं है। ऐसे में वही प्रशांत किशोर अगर कांग्रेस नेतृत्व के साथ संवाद और नजदीकी बढ़ा रहे हैं, तो इसे केवल औपचारिक मुलाकात मानकर नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां कांग्रेस लोकसभा चुनावों के बाद संगठन को मजबूत करने और जमीनी राजनीति को धार देने की कोशिश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर बिहार में जनसूराज पार्टी के जरिए एक वैकल्पिक राजनीतिक प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जनसूराज की राजनीति और कांग्रेस के राष्ट्रीय एजेंडे के बीच कोई साझा रणनीतिक जमीन तैयार हो रही है, या फिर यह केवल भविष्य की संभावनाओं को टटोलने की कवायद है।
कांग्रेस के भीतर भी इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पार्टी का एक वर्ग मानता है कि प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकार की एंट्री कांग्रेस को चुनावी तौर पर नई धार दे सकती है, खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी लगातार कमजोर हुई है। वहीं दूसरा वर्ग यह सवाल भी उठा रहा है कि जो व्यक्ति लंबे समय तक कांग्रेस की आलोचना करता रहा हो, उसकी भूमिका पार्टी की विचारधारा और आंतरिक लोकतंत्र के साथ कैसे तालमेल बिठाएगी।
फिलहाल न तो कांग्रेस और न ही प्रशांत किशोर की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान आया है। लेकिन राजनीति में अक्सर खामोशी भी एक संकेत होती है। इतना तय है कि अगर प्रशांत किशोर का कांग्रेस में आना वास्तव में होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की पार्टी बदलने की खबर नहीं होगी, बल्कि भारतीय राजनीति में रणनीति, संगठन और विपक्षी राजनीति के समीकरणों को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मुलाकात के निहितार्थ क्या रूप लेते हैं, इस पर देश की सियासत की नजरें टिकी रहेंगी।




