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फरीदाबाद में हैवानियत: गैंगरेप, बेरहमी से पीटा और चलती वैन से फेंका, दो गिरफ्तार

सुमन कुमार | फरीदाबाद 31 दिसंबर 2025

चलती वैन में दरिंदगी की खौफनाक कहानी

हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आई यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। 29–30 दिसंबर 2025 की रात एक 25 वर्षीय महिला के साथ ऐसी हैवानियत हुई, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि दो युवकों ने महिला को लिफ्ट देने के बहाने वैन में बैठाया, फिर चलती गाड़ी में उसके साथ घंटों तक सामूहिक दुष्कर्म किया। जब महिला ने विरोध किया तो उसे बेरहमी से पीटा गया। इसके बाद आरोपी उसे मरी हुई समझकर चलती वैन से सड़क पर फेंककर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल महिला काफी देर तक सड़क पर पड़ी रही, बाद में स्थानीय लोगों ने उसे देखा और अस्पताल पहुंचाया।

चेहरे पर 12 टांके, गहरे जख्म और गहरा सदमा

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक महिला के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं। डॉक्टरों को उसके चेहरे पर 12 टांके लगाने पड़े। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन शारीरिक चोटों के साथ-साथ मानसिक आघात बेहद गहरा है। डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता को लंबे समय तक चिकित्सकीय और मानसिक देखभाल की जरूरत होगी।

त्वरित कार्रवाई: सीसीटीवी से सुराग, आरोपी गिरफ्तार

पीड़िता की बहन की शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी फरीदाबाद के ही निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दिन हो या रात, इस तरह की वारदातें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि महिलाएं आखिर खुद को कब सुरक्षित महसूस करेंगी। सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं है, जरूरत है तेज़ न्याय, सख्त सजा और ऐसी प्रभावी व्यवस्था की, जिससे अपराधियों में कानून का भय हो और महिलाओं में भरोसा पैदा हो।

इंसानियत की कसौटी पर समाज

फरीदाबाद की यह वारदात केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। पीड़िता के साथ हुआ अमानवीय व्यवहार बताता है कि महिला सुरक्षा को लेकर अब सिर्फ बयान और वादे नहीं, बल्कि ठोस, ज़मीनी और ईमानदार कार्रवाई की जरूरत है—ताकि कोई और महिला ऐसी दरिंदगी का शिकार न बने और समाज इंसानियत की कसौटी पर खरा उतर सके।

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