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शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर, बोले धर्मेंद्र प्रधान — भारत की ताकत उसका ज्ञान तंत्र

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 3 मार्च 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की बात कही है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘Study in India Edu-Diplomatic Conclave 2026’ में उन्होंने 50 से अधिक देशों के राजनयिकों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, बड़ी युवा आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।

कार्यक्रम Sushma Swaraj Bhawan में आयोजित किया गया। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि आज की बदलती दुनिया में शिक्षा ही वह माध्यम है जो देशों और समाजों को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि भारत अपने साझेदार देशों के साथ मजबूत ज्ञान सेतु बनाना चाहता है और शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देना चाहता है।

धर्मेंद्र प्रधान ने विदेशी प्रतिनिधियों से अपील की कि वे भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार आधारित और बहुविषयक शिक्षा प्रणाली के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में सुधार, अनुसंधान को बढ़ावा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारत विदेशी छात्रों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है, क्योंकि यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उचित लागत पर उपलब्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी पूंजी है और सही शिक्षा व कौशल विकास से यह शक्ति वैश्विक स्तर पर भी योगदान दे सकती है।

कार्यक्रम में शामिल कई देशों के राजनयिकों ने भारत की शिक्षा प्रणाली में रुचि दिखाई। आने वाले समय में छात्र विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं और शैक्षणिक समझौते बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से देश की उच्च शिक्षा प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।

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