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सत्ता के नशे में बीजेपी नेता ने किसान को थार से कुचलकर मार डाला, बेटियों के कपड़े फाड़े

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भोपाल/ नई दिल्ली 28 अक्टूबर 2025

मध्य प्रदेश का गुना ज़िला आज एक ऐसी भयावह और शर्मनाक घटना का साक्षी बना है, जिसने पूरे देश में गुस्से, आक्रोश और राजनीतिक बहस की लहर पैदा कर दी है। यहाँ एक स्थानीय बीजेपी नेता महेंद्र नागर ने सत्ता के घमंड और अहंकार में इंसानियत की सभी नैतिक और कानूनी सीमाओं को पार कर दिया। यह क्रूर घटना ज़मीन कब्जाने के एक विवाद से शुरू हुई, जिसमें आरोपी बीजेपी नेता ने एक गरीब किसान को अपनी तेज रफ्तार थार गाड़ी से बर्बरतापूर्वक कुचलकर मौके पर ही मार डाला। इस दरिंदगी का सबसे वीभत्स पहलू तब सामने आया, जब किसान की बेटियाँ अपने पिता को बचाने और न्याय की गुहार लगाने के लिए मौके पर पहुंचीं; महेंद्र नागर और उसके गुर्गों ने न केवल उन्हें धमकाया और गाली-गलौज की, बल्कि उनके कपड़े फाड़ दिए और पूरे इलाके में दहशत फैलाने के लिए कई राउंड गोलियां भी चलाईं। 

यह वारदात महज़ एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र और मानवता की गर्दन पर सत्ता के घमंड का बूट रखने जैसा कृत्य है। गुना की इस भयावह घटना ने एक बार फिर यह तीखा सवाल उठा दिया है कि क्या बीजेपी शासित प्रदेशों में तथाकथित “विकास” का मतलब अब केवल “भय, हिंसा और दबंगई का जंगलराज” रह गया है, जहाँ कानून और प्रशासन सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के इशारों पर नाचते हैं।

भू-माफिया बना बीजेपी नेता, जिसने किसान की मेहनत और जान को रौंद दिया

गुना के स्थानीय स्रोतों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस क्रूर वारदात का मुख्य आरोपी महेंद्र नागर न केवल बीजेपी का एक प्रभावशाली स्थानीय नेता है, बल्कि वह अपने इलाके का कुख्यात भू-माफिया भी है। ग्रामीणों ने बताया कि नागर लंबे समय से इस किसान की पुश्तैनी ज़मीन को जबरन और अवैध तरीके से कब्जाने की कोशिश कर रहा था, जिसका विरोध किसान द्वारा लगातार किया जा रहा था। किसान के इसी विरोध से आक्रोशित होकर और सत्ता के नशे में चूर नागर ने पहले उसकी बेरहमी से पिटाई की, और फिर उसे सबक सिखाने की नीयत से अपनी महंगी थार गाड़ी से जानबूझकर रौंद डाला।

 प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह सब कुछ एक योजनाबद्ध साजिश की तरह प्रतीत होता था; हमलावर अपने गुर्गों की पूरी फौज के साथ किसान के खेत पर पहुंचे थे, और जब किसान ने प्रतिरोध किया तो नागर ने अहंकार में चिल्लाकर कहा — “तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे सामने खड़े होने की?” इसके बाद उसे मारा-पीटा गया, घसीटा गया और अंत में गाड़ी चढ़ा दी गई, जिससे मौके पर ही किसान की दर्दनाक मौत हो गई। गांववालों के अनुसार, नागर का आतंक और दबदबा इतना ज्यादा है कि कोई भी व्यक्ति खुलकर उसके खिलाफ बोलने या पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, क्योंकि वह खुलेआम धमकी देता है कि “सरकार मेरी है” और वह बड़े-बड़े अधिकारियों तथा बीजेपी नेताओं से सीधा संपर्क रखता है।

किसान की बेटियों के साथ दरिंदगी — सत्ता के अंधेपन की पराकाष्ठा 

इस पूरे घटनाक्रम का जो पहलू सबसे ज्यादा भयावह, हृदय विदारक और शर्मसार करने वाला है, वह है किसान की बेटियों के साथ की गई दरिंदगी। गांववालों के मुताबिक, जब किसान की बेटियां अपने पिता को बचाने और मदद के लिए रोती-बिलखती हुई खेत की ओर भागीं, तो उन्होंने देखा कि उनके पिता ज़मीन पर लहूलुहान पड़े थे। लेकिन वहां मौजूद बीजेपी नेता महेंद्र नागर ने इंसानियत और कानून की सभी हदें पार करते हुए न केवल उन्हें धमकाया, बल्कि उनकी अस्मिता पर हमला करते हुए उनके कपड़े फाड़ दिए। अपनी दबंगई और कानून के प्रति पूर्ण अनादर दिखाते हुए उसने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बनाने के लिए कई राउंड हवाई फायरिंग भी की ताकि कोई भी ग्रामीण या पड़ोसी पास आकर उनकी मदद न कर सके।

 यह कृत्य न केवल एक घिनौना कानूनी अपराध है, बल्कि यह सामाजिक नैतिकता, स्त्री सम्मान और नागरिक अधिकारों की जड़ों पर किया गया एक निर्मम हमला है। देश में छठ जैसे पवित्र त्योहार के समय, जब लोग अपने परिवार के सम्मान और संस्कृति की पूजा कर रहे थे, उसी भारत की धरती पर सत्ता की हेकड़ी और गुंडागर्दी में बेटियों की इज़्ज़त को नोंच डाला गया, जो ‘बीजेपी राज’ के असली और क्रूर चेहरे को प्रदर्शित करता है।

बीजेपी की संस्कृति: किसान को कीड़ा समझना, गरीब को अपराधी मानना 

यह कोई अकेली या पहली घटना नहीं है जब सत्ताधारी बीजेपी के किसी नेता पर इस तरह की अमानवीय और दरिंदगीपूर्ण हिंसा का आरोप लगा हो। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे पर अपनी कार किसानों पर चढ़ाकर उन्हें कुचलने का आरोप लगा था। अब, वही क्रूर और भयावह दृश्य मध्य प्रदेश में दोहराया गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का यह स्पष्ट आरोप है कि बीजेपी की विचारधारा और संस्कृति में गरीब, किसान और मज़दूरों के लिए कोई जगह नहीं है। सत्ता के असीमित नशे में डूबे हुए इनके नेता और कार्यकर्ता आम जनता, विशेषकर गरीब और दलित तबके को “कीड़े-मकोड़े” से ज्यादा कुछ नहीं समझते हैं। 

विपक्षी नेताओं ने कहा है कि किसान, मजदूर, और आदिवासी समुदाय बीजेपी के लिए सिर्फ वोट और सरकारी योजनाओं के आंकड़े हैं, इंसान नहीं। जब भी कोई गरीब नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार या अपनी ज़मीन की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाता है, तो सत्ता के मद में चूर नेता का बुलडोज़र या उनकी थार गाड़ी का टायर उस पर चढ़ जाता है, जो यह साबित करता है कि इस शासन में गरीब की जान की कोई कीमत नहीं है।

जब सत्ता हिंसा बन जाए, तो लोकतंत्र मर जाता है 

गुना की यह शर्मनाक घटना एक बार फिर से तथाकथित “डबल इंजन सरकार” यानी बीजेपी शासन की असली, क्रूर और हिंसक तस्वीर दिखाती है — यह तस्वीर दर्शाती है कि जहाँ सत्ता के संरक्षण में अपराध, भय, गुंडागर्दी और दमन खुलकर फल-फूल रहे हैं। यह घटना सिर्फ एक निर्दोष किसान की नृशंस हत्या नहीं है, बल्कि यह उस भारत की आत्मा और आदर्शों की मौत है जो पीढ़ियों से “जय जवान, जय किसान” का नारा लगाता रहा है।

 यमुना नदी के जहरीले झाग की तरह, देश का लोकतंत्र भी अब केवल प्रचार के झूठ और हिंसा के खून में डूबता जा रहा है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आरोपी महेंद्र नागर और उसके गुर्गे कब और कैसे पकड़े जाएंगे — बल्कि सबसे बड़ा और मूलभूत सवाल यह है कि कब तक सत्ता के पहिए गरीब, मज़बूत और किसान की छाती पर चढ़ते रहेंगे और सत्ताधारी सरकारें इस पर मौन धारण करके अपराधियों को संरक्षण देती रहेंगी? यह घटना एक तीखी चेतावनी है कि जब कानून का राज समाप्त हो जाता है और सत्ता स्वयं ही हिंसा का औजार बन जाती है, तब किसी भी देश का लोकतंत्र अपरिहार्य रूप से मर जाता है।

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