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ईरान-अमेरिका डील का ड्राफ्ट सामने! होर्मुज खोलने और अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी खत्म करने पर सहमति के संकेत

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान / वॉशिंगटन | 28 मई 2026

Iran और United States के बीच जारी तनाव और महीनों से चल रहे युद्ध के बीच अब एक संभावित समझौते की रूपरेखा सामने आने लगी है। ईरानी सरकारी टीवी ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच तैयार हो रहे ड्राफ्ट समझौते में अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) को समाप्त करने, खाड़ी क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी घटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाज़ी आवाजाही बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई है।

रिपोर्ट के अनुसार यह ड्राफ्ट अभी अंतिम नहीं है, लेकिन इसमें युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनती दिखाई दे रही है। फरवरी 2026 में शुरू हुए युद्ध और अप्रैल 8 से लागू नाज़ुक संघर्षविराम के बाद पहली बार ऐसा संकेत मिला है कि दोनों पक्ष किसी व्यापक समझौते की ओर बढ़ सकते हैं।

होर्मुज पर क्या है प्रस्ताव?

ड्राफ्ट के मुताबिक, Iran एक महीने के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाज़ों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्थिति में बहाल करेगा। हालांकि ईरान जहाज़ी मार्गों की निगरानी, निरीक्षण और सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार अपने पास रखेगा। यह शर्त विशेष रूप से सैन्य जहाज़ों पर लागू नहीं होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्ध के बाद यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया।

अमेरिकी घेराबंदी खत्म करने की बात

ईरानी टीवी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और जहाज़ों पर लागू नौसैनिक घेराबंदी समाप्त करने का आश्वासन दिया है। अप्रैल 13 से अमेरिकी नौसेना ने ईरानी समुद्री गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया था, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा।

ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों और तैनाती को लेकर ईरान को “प्रतिबद्धता” देगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसमें केवल युद्धकालीन अतिरिक्त तैनाती शामिल होगी या खाड़ी में मौजूद स्थायी अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी।

60 दिन की निर्णायक बातचीत

रिपोर्ट के अनुसार यदि प्रारंभिक रूपरेखा पर सहमति बनती है तो दोनों देश 60 दिनों तक विस्तृत वार्ता करेंगे। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर अंतिम समझौता तैयार किया जाएगा। ईरानी मीडिया का दावा है कि अंतिम डील होने पर इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में पारित कराया जा सकता है।

ईरान का बड़ा आरोप

इसी बीच Iranian Intelligence Ministry ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल अब भी इस्लामिक रिपब्लिक की सत्ता को कमजोर करने और देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि सैन्य हमलों में असफल रहने के बाद अब आर्थिक दबाव, धार्मिक और जातीय विभाजन तथा “तोड़फोड़ और आतंकवादी गतिविधियों” के जरिए ईरान को निशाना बनाया जा सकता है।

ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी ताकतें अवैध संचार उपकरणों, हथियारों और स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट सिस्टम की तस्करी बढ़ाने की योजना बना रही हैं।

वैश्विक असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ेगा। भारत सहित कई देशों की नजर इस डील पर टिकी हुई है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकती है और तेल कीमतों में राहत मिल सकती है।

हालांकि अभी तक United States की ओर से इस ड्राफ्ट पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, व्हाइट हाउस के कुछ सूत्रों ने पहले ऐसी रिपोर्टों को “अपूर्ण और अपुष्ट” बताया था। इसके बावजूद बढ़ती बातचीत और बैक-चैनल कूटनीति इस बात का संकेत दे रही है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय बाद किसी बड़े समझौते की जमीन तैयार हो रही है।

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