एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि पिछले सत्र में पारित किया गया तथाकथित “SHANTI Bill” निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के स्वामित्व और संचालन की अनुमति देने के उद्देश्य से जल्दबाज़ी में पारित कराया गया।
जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान ही आशंका जताई थी कि यह विधेयक “किसी खास उद्योगपति को फायदा पहुंचाने” के लिए लाया जा रहा है। अब उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि SHANTI का असली अर्थ है — “Shriman Adani’s Nuclear Tech Initiative”। उन्होंने इस संबंध में एक वीडियो लिंक भी साझा किया है और कहा है कि हालिया कॉरपोरेट घटनाक्रम उनके संदेह को मजबूत करते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब Adani Power Limited ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में अपनी एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी “Adani Atomic Energy Limited” के गठन की जानकारी दी है। कंपनी ने यह सूचना सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी है। दस्तावेज़ के अनुसार, नई इकाई का गठन परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संभावित व्यावसायिक अवसरों की खोज के उद्देश्य से किया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के स्वामित्व और संचालन की अनुमति दी जाती है, तो यह भारत की दीर्घकालिक परमाणु नीति में बड़ा बदलाव होगा। जयराम रमेश ने कहा कि परमाणु ऊर्जा केवल व्यावसायिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व का क्षेत्र है। ऐसे में किसी भी बदलाव पर व्यापक संसदीय चर्चा और पारदर्शिता आवश्यक है।
हालांकि सरकार की ओर से पहले यह स्पष्ट किया गया था कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी सीमित और नियामकीय ढांचे के भीतर ही होगी। केंद्र का तर्क है कि ऊर्जा मांग को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक कंपनी के सहायक उपक्रम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे व्यापक सवाल उठते हैं—क्या भारत अपनी परमाणु ऊर्जा नीति में संरचनात्मक बदलाव की ओर बढ़ रहा है? क्या निजी क्षेत्र को संयंत्र संचालन की अनुमति दी जाएगी, या यह केवल आपूर्ति श्रृंखला और सहायक सेवाओं तक सीमित रहेगा?
फिलहाल, सरकार या संबंधित कंपनी की ओर से जयराम रमेश के आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि “SHANTI Bill” और परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर तीखी बहस का कारण बन सकता है।





