Home » Health » ऑनलाइन एबॉर्शन पिल्स की मांग में तेज़ उछाल, किशोर और युवा बने सबसे बड़े उपभोक्ता

ऑनलाइन एबॉर्शन पिल्स की मांग में तेज़ उछाल, किशोर और युवा बने सबसे बड़े उपभोक्ता

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

स्वास्थ्य / विज्ञान | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अप्रैल 2026

देश और दुनिया में डिजिटल हेल्थ सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म के जरिए एबॉर्शन पिल्स की मांग में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 25% से 35% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान किशोरों और युवा वर्ग का बताया गया है।

अध्ययन के अनुसार, 18 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं इस ट्रेंड का केंद्र हैं, जबकि 15–17 वर्ष के किशोरों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ता दिखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल सुविधा का परिणाम नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव, गोपनीयता की चाह और रिश्तों के बदलते स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है।

भारत जैसे देशों में इस तरह की ऑनलाइन मांग का कोई एक आधिकारिक राज्य-वार डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के संकेत बताते हैं कि महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे शहरी और उच्च इंटरनेट उपयोग वाले राज्यों में इसकी मांग अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं छोटे शहरों और कस्बों में भी यह प्रवृत्ति तेजी से फैल रही है।

शहरी और ग्रामीण अंतर की बात करें तो अनुमानित तौर पर:

1. मेट्रो सिटी: लगभग 45%–50% मांग

2. छोटे शहर/टियर-2: करीब 30%–35%

3. ग्रामीण क्षेत्र: लगभग 15%–20%

यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि डिजिटल पहुंच बढ़ने के साथ-साथ यह प्रवृत्ति अब गांवों तक भी धीरे-धीरे फैल रही है।

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि टेलीहेल्थ सेवाओं के जरिए सबसे ज्यादा जिन दवाइयों की मांग हो रही है, वे हैं मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone) और मिसोप्रोस्टोल (Misoprostol), जिन्हें मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस के तहत सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन सिर्फ सही समय, सही मात्रा और डॉक्टर की निगरानी में।

डॉक्टरों की चेतावनी है कि बिना उचित जांच—जैसे गर्भ की अवधि, महिला की स्वास्थ्य स्थिति और संभावित जोखिम—इन दवाओं का उपयोग गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है। इनमें अत्यधिक रक्तस्राव, अधूरा गर्भपात और संक्रमण जैसे खतरे शामिल हैं।

अध्ययन ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के बाद टेलीमेडिसिन के उपयोग में आई तेजी ने इस ट्रेंड को और बढ़ाया है। लॉकडाउन के दौरान जो डिजिटल हेल्थ सेवाएं मजबूरी में शुरू हुई थीं, अब वे युवाओं के लिए एक सामान्य और पसंदीदा विकल्प बन चुकी हैं।

सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिकता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बदलती जीवनशैली का इस प्रवृत्ति पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। खासकर शहरी युवाओं में रिश्तों और निर्णय लेने के तरीके तेजी से बदले हैं, जहां पारंपरिक सामाजिक नियंत्रण पहले जैसा प्रभावी नहीं रह गया।

हालांकि, विशेषज्ञ संध्या बंसल का कहना है कि सुविधा के साथ-साथ जागरूकता, सुरक्षित चिकित्सा मार्गदर्शन और नियमों, कायदों या दिशानिर्देशों के माध्यम से नियंत्रित
करना बेहद जरूरी है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि वे इस डिजिटल बदलाव को नियंत्रित और सुरक्षित बनाएं, ताकि युवाओं का स्वास्थ्य किसी भी तरह के जोखिम में न पड़े।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments