एबीसी डेस्क 14 दिसंबर 2025
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 400 के पार पहुंचते ही हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। जहरीली स्मॉग और दमघोंटू हवा को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा और सबसे सख्त चरण—GRAP-4 लागू कर दिया है। यह चरण तब लागू किया जाता है जब प्रदूषण ‘गंभीर से अति-गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है और आम लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा बन जाता है। GRAP-4 के लागू होते ही दिल्ली में निर्माण गतिविधियों से लेकर दफ्तरों, स्कूलों और वाहनों तक कई कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं।
GRAP-4 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) से जुड़े सभी गैर-जरूरी काम पूरी तरह रोक दिए गए हैं। सड़क, इमारत, फ्लाईओवर या किसी भी तरह का सामान्य निर्माण अब नहीं होगा। सिर्फ वही परियोजनाएं जारी रह सकेंगी जो अत्यावश्यक सेवाओं, सार्वजनिक सुरक्षा या आपात जरूरतों से जुड़ी हों। इसके अलावा डीजल जेनरेटर सेट्स के इस्तेमाल पर भी सख्त रोक लगा दी गई है, सिवाय अस्पतालों, आपात सेवाओं और आवश्यक बुनियादी ढांचे के। औद्योगिक इकाइयों को भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को सीमित करें या अस्थायी रूप से बंद रखें।
वाहनों को लेकर भी कड़े कदम उठाए गए हैं। प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों और ट्रकों की दिल्ली-एनसीआर में एंट्री पर रोक लगा दी गई है, जबकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े वाहनों को सशर्त अनुमति दी गई है। सरकार और प्रशासन का मानना है कि ट्रैफिक और डीजल-आधारित वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण की स्थिति को और बिगाड़ रहा है, इसलिए इन पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।
कामकाज और दफ्तरों को लेकर भी बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) करने का निर्देश/अपील दी गई है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और प्रदूषण में कुछ राहत मिल सके। बाकी 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आएंगे, वह भी न्यूनतम आवाजाही और आवश्यक सावधानियों के साथ। इससे न सिर्फ ट्रैफिक घटेगा, बल्कि लोगों को जहरीली हवा में बाहर निकलने से भी कुछ हद तक बचाया जा सकेगा।
स्कूलों के संचालन में भी अहम बदलाव किया गया है। GRAP-4 के लागू होते ही स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने का फैसला लिया गया है। यानी कुछ कक्षाएं ऑनलाइन होंगी और कुछ सीमित रूप से ऑफलाइन। छोटे बच्चों और प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों को खासतौर पर घर से पढ़ाई कराने पर जोर दिया गया है, क्योंकि बच्चों की सेहत पर प्रदूषण का असर ज्यादा खतरनाक माना जाता है। बोर्ड कक्षाओं (10वीं-12वीं) के लिए जरूरत के हिसाब से ऑफलाइन कक्षाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन उन्हें भी मास्क और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ स्कूल आने की सलाह दी गई है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम लोगों के लिए भी सख्त स्वास्थ्य सलाह जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, सुबह-शाम की सैर और खुले में व्यायाम से बचें, और बाहर जाते समय N95 जैसे अच्छे मास्क का इस्तेमाल करें। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण आंखों में जलन, सांस फूलना, खांसी, सिरदर्द और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
कुल मिलाकर, GRAP-4 का लागू होना यह संकेत देता है कि दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। सरकार और प्रशासन का दावा है कि ये सख्त कदम अस्थायी हैं, लेकिन जरूरी हैं ताकि हालात और न बिगड़ें। आने वाले दिनों में मौसम और हवा की दिशा पर काफी कुछ निर्भर करेगा। तब तक नागरिकों से अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करें, संयम बरतें और अपनी व अपने परिवार की सेहत को प्राथमिकता दें।




