एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 15 फरवरी 2026
भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए कृषि क्षेत्र पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत के किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
राहुल गांधी ने पहला सवाल DDG (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) के आयात को लेकर उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) अमेरिकी मक्का से बने चारे पर निर्भर होना पड़ेगा? उनका तर्क है कि यदि ऐसा होता है तो क्या भारत का डेयरी सेक्टर अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएगा?
दूसरा बड़ा सवाल GM सोया तेल के आयात को लेकर है। राहुल गांधी ने पूछा कि यदि सस्ते आयातित सोया तेल को अनुमति दी जाती है तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित देशभर के सोया किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा? उन्होंने आशंका जताई कि घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और किसान एक और “कीमत झटका” झेलने को मजबूर हो सकते हैं।
तीसरे बिंदु में राहुल गांधी ने “additional products” शब्दावली पर स्पष्टता मांगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या भविष्य में दालों और अन्य फसलों को भी अमेरिकी आयात के लिए खोला जाएगा? क्या यह धीरे-धीरे कृषि क्षेत्र के और हिस्सों को समझौते में शामिल करने की दिशा में कदम है?
चौथा सवाल “non-trade barriers” हटाने के संदर्भ में था। राहुल गांधी ने पूछा कि क्या इससे भारत पर जीएम फसलों के प्रति अपना रुख बदलने, सरकारी खरीद व्यवस्था को कमजोर करने या MSP और बोनस जैसी नीतियों में ढील देने का दबाव आएगा?
अंत में उन्होंने पूछा कि यदि यह दरवाजा एक बार खुल गया, तो हर साल इसके और अधिक खुलने से कैसे रोका जाएगा? क्या कोई सुरक्षा तंत्र होगा या हर नए समझौते में धीरे-धीरे और फसलें शामिल की जाएंगी?
राहुल गांधी ने कहा कि किसानों को इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। यह केवल आज की आर्थिक नीति का मामला नहीं, बल्कि भारत की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक भविष्य का प्रश्न है।
सरकार का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में राष्ट्रीय हित और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होती दिख रही है और आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना है।




