पटना / नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2025
भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है। पूर्व राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक ऐसे नेता को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है, जिन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने आर्थिक अनियमितताओं और आपराधिक षड्यंत्र के एक गंभीर मामले में दोषी ठहराया था।
जैसे ही पटना स्थित भाजपा कार्यालय में इस नेता को फूल-मालाओं के साथ स्वागत करने की खबर सामने आई, विपक्ष ने फौरन तंज कसना शुरू कर दिया। विपक्ष का सीधा आरोप है कि भ्रष्टाचार मिटाने का नारा देने वाली पार्टी अब सीबीआई से सजा पाए नेताओं को गले लगा रही है, और ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी की ‘वॉशिंग मशीन’ ने एक बार फिर एक दागी नेता को ‘चमका’ दिया है। इस घटना ने एक बार फिर बीजेपी की नैतिकता और उसकी ‘शुद्धिकरण’ की नीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
विपक्षी नेताओं ने इस कदम को बीजेपी की “राजनीतिक शुद्धिकरण केंद्र” बनने की जगह “अपराधियों के लिए पॉलिटिकल लॉन्ड्री” बनने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने तीखे शब्दों में कहा है कि बीजेपी में शामिल होते ही किसी भी नेता के सारे पाप धुल जाते हैं; अदालत की सजा, जांच एजेंसी की रिपोर्ट और राजनीतिक नैतिकता, सब कुछ गायब हो जाता है, और केवल ‘कमल का चमत्कार’ ही शेष रह जाता है।
इस नेता की पृष्ठभूमि यह है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें कुछ साल पहले ही दोषसिद्ध किया था, जिसके बाद वे सार्वजनिक जीवन से लगभग दूर हो गए थे। इसके बावजूद, आज उन्हें न सिर्फ बीजेपी में शामिल किया गया, बल्कि कार्यालय में उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसने जनता के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि “क्या अब बीजेपी में आना ही किसी के लिए सबसे बड़ा क्लीन चिट है?” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बीजेपी के दोहरा मापदंड को उजागर करती है।
एक तरफ, पार्टी विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप झेलती है, वहीं दूसरी तरफ, इन्हीं एजेंसियों द्वारा दोषी ठहराए गए नेताओं को गले लगाकर अपनी ही नैतिकता को ताक पर रख देती है। यह कदम बिहार की आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसने निश्चित रूप से बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर पर फैले ‘वॉशिंग मशीन’ राजनीति के आरोपों को और मज़बूती दी है।
बीजेपी द्वारा ऐसे नेताओं को शामिल करना, जो न्यायपालिका द्वारा दोषसिद्ध किए गए हैं, यह संकेत देता है कि राजनीतिक लाभ के सामने पार्टी के लिए उसकी ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ की विचारधारा का कोई खास महत्व नहीं रह जाता है। इस घटना से बीजेपी को विपक्ष के साथ-साथ जनता के बीच भी तीखी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है, जिसने उसकी ‘शुद्धता’ की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है।




