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रियाद में कनेक्टेड बैंकिंग समिट 2025 — सऊदी अरब ने दिखाई नई डिजिटल अर्थव्यवस्था की ताकत

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अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 8 नवंबर 2025

सऊदी अरब का सपना अब हकीकत बन रहा है। देश की राजधानी रियाद में हुई कनेक्टेड बैंकिंग समिट 2025 ने साबित कर दिया कि “विजन 2030” अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक चलती हुई प्रक्रिया है। रैडिसन ब्लू कन्वेंशन सेंटर में हुए इस बड़े आयोजन में बैंकों के प्रमुख अधिकारी, तकनीक के जानकार, फिनटेक कंपनियाँ और सरकारी अधिकारी एक मंच पर आए। सभी ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे सऊदी अरब आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग और आधुनिक वित्तीय सेवाओं का केंद्र बन सकता है।

यह समिट केवल भाषणों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रही। इसमें यह दिखाया गया कि देश का बैंकिंग सिस्टम अब वाकई बदल रहा है। अब बैंक अपने ग्राहकों तक पहुँचने के लिए मोबाइल ऐप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सऊदी अरब में अब बैंकिंग पहले से तेज़, आसान और भरोसेमंद बन रही है। सरकार ने साफ कहा कि यह बदलाव विजन 2030 का हिस्सा है — यानी तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था से निकलकर डिजिटल और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम।

वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद अलसर्रानी ने बताया कि “अब हमारे लिए नीतियाँ नहीं, बल्कि काम मायने रखता है। सऊदी अरब का बैंकिंग क्षेत्र अब डिजिटल बदलाव के असली दौर में पहुँच चुका है।” उन्होंने कहा कि हर बैंक को अपनी सेवाएँ इस तरह बनानी होंगी कि आम आदमी को उसका फायदा सीधे मिले।

बैंक ऑफ जॉर्डन (KSA) की सीईओ डॉ. सोहा हुसैन अबुल फराग ने कहा कि “टेक्नोलॉजी तभी सफल होती है जब वह भरोसे पर टिकी हो।” उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग में लोगों का विश्वास बहुत ज़रूरी है, तभी ग्राहक इसे अपनाएंगे।

इसी कार्यक्रम में ऑडिट और गवर्नेंस विशेषज्ञ धारी अल-शम्मरी ने कहा कि “इनोवेशन तभी सफल होता है जब उसके साथ अच्छी व्यवस्था और सुरक्षा हो।” उन्होंने साइबर सुरक्षा और मजबूत संचालन व्यवस्था की ज़रूरत पर जोर दिया।

अल्फा बैंक के बोर्ड सदस्य मरात इस्मागुलोव ने कहा कि “AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तभी असर दिखा सकता है जब लोग उसके साथ काम करने की सही ट्रेनिंग लें।” उन्होंने बताया कि बैंकिंग क्षेत्र में अब इंसानों और मशीनों दोनों की भूमिका बराबर हो गई है।

सम्मेलन में Zoom, Nintex, Appice, Newgen जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम के ज़रिए बैंक अब तेजी से फैसले ले पा रहे हैं, और ग्राहकों को बेहतर सेवा दे पा रहे हैं। अब किसी को घंटों लाइन में लगने की ज़रूरत नहीं है। कुछ क्लिक में ही बैंकिंग का काम पूरा हो रहा है।

समिट में उन बैंकों और कंपनियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने डिजिटल बैंकिंग में बड़ा काम किया है।

बैंक अलबिलाद को डिजिटल बैंकिंग में उत्कृष्टता के लिए सम्मान मिला।

अल्फा बैंक को एआई के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए अवॉर्ड मिला।

निंटेक्स को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के लिए सम्मान मिला।

ऐपाइस को डिजिटल इनोवेशन के लिए पुरस्कृत किया गया।

फर्स्ट अबू धाबी बैंक (KSA) को क्रॉस बॉर्डर सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए अवॉर्ड दिया गया।

इन अवॉर्ड्स से यह साबित हुआ कि अब सऊदी के बैंक केवल योजनाएँ नहीं बना रहे, बल्कि जमीन पर काम कर रहे हैं।

पूरे सम्मेलन का मुख्य संदेश था — बैंकिंग अब केवल लेन-देन का काम नहीं रहा। यह लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग अब घर, मोबाइल और जीवनशैली में शामिल हो रही है। वक्ताओं ने कहा कि “बैंकिंग का भविष्य वही है जो तकनीक और भरोसे दोनों को साथ लेकर चले।”

इस कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक अलायंसेज़ (ICSA) ने किया। यह संस्था दुनिया भर के नेताओं, निवेशकों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के लिए जानी जाती है। ICSA ऐसे कार्यक्रम करती है जिनसे दुनिया में तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ सके।

रियाद की यह समिट सऊदी अरब के बदलते भविष्य की तस्वीर थी। अब देश सिर्फ़ तेल के दम पर नहीं, बल्कि तकनीक, बैंकिंग और नवाचार के दम पर आगे बढ़ना चाहता है।

विजन 2030 अब कागज़ों से निकलकर मोबाइल ऐप, डिजिटल बैंक और ऑनलाइन सेवाओं में उतर चुका है। और यही वजह है कि आज रियाद सिर्फ़ खाड़ी का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी हब बनता जा रहा है। सऊदी अरब अब यह दिखा रहा है कि बदलाव केवल सोचा नहीं जाता — उसे किया भी जाता है। 

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