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केरल में कांग्रेस की ज़ोरदार वापसी: स्थानीय निकाय चुनावों में UDF की बड़ी जीत, विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत संकेत

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एबीसी डेस्क 13 दिसंबर 2025

केरल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ देखने को मिला है। स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को करारा झटका देते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की है। नगर निगमों, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों में UDF के प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि राज्य की जनता ने मौजूदा सत्ता व्यवस्था के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया है। वर्षों से केरल की राजनीति में लोकल बॉडी चुनावों को विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जाता रहा है, और इस लिहाज़ से यह नतीजा आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करता दिख रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस जीत को केरल की जनता के विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में मिले जनादेश ने यह साबित कर दिया है कि लोग UDF के साथ खड़े हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी जनता UDF को इसी तरह समर्थन देगी। खरगे ने यह भी कहा कि इसी भरोसे के साथ केरल कांग्रेस पूरी जिम्मेदारी और एकजुट उद्देश्य के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी UDF की जीत को “स्मैशिंग विक्ट्री” करार दिया। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि नगर निगमों में UDF ने LDF पर 4:1 की बढ़त बनाई, नगरपालिकाओं में 54:28 का स्पष्ट अंतर रहा, जबकि ग्राम पंचायतों में 503 सीटों के मुकाबले 342 सीटें जीतकर UDF ने मजबूत बढ़त हासिल की। जिला पंचायतों में मुकाबला बराबरी का रहा, लेकिन कुल मिलाकर तस्वीर UDF के पक्ष में साफ दिखाई दी। चिदंबरम ने इस सफलता का श्रेय केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के संगठनात्मक ढांचे, जमीनी मेहनत और पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता को दिया।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी केरल की जनता को सलाम करते हुए कहा कि यह जनादेश निर्णायक और उत्साहवर्धक है। उनके अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे यह दिखाते हैं कि UDF के प्रति जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और यह रुझान आगामी विधानसभा चुनावों में बड़े बदलाव का संकेत देता है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केरल की जनता जवाबदेह शासन चाहती है—ऐसा शासन जो जनता की बात सुने, समय पर प्रतिक्रिया दे और ज़मीन पर परिणाम दे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और एर्नाकुलम जैसे अहम शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस की दमदार वापसी ने LDF की चिंता बढ़ा दी है। कोल्लम नगर निगम में LDF को मिली बड़ी हार और NDA का बेहद कमजोर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि मुकाबला अब मुख्य रूप से UDF और LDF के बीच सिमटता जा रहा है। साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता, खासकर वायनाड जैसे इलाकों में, कांग्रेस के लिए सकारात्मक माहौल बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

कुल मिलाकर, केरल के स्थानीय निकाय चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में बदलाव की तेज़ आंधी चल रही है। अगर यही रुझान बरकरार रहता है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF बड़ी जीत के साथ सत्ता में वापसी कर सकता है। केरल की जनता ने एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा जताया है—अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह भरोसा विधानसभा चुनावों में किस रूप में सामने आता है।

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