2020 में, COVID-19 लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के कारण वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में लगभग 7.8% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट थी। हालांकि यह एक सकारात्मक पर्यावरणीय परिणाम था, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि यह एक अस्थायी गिरावट थी और इसका दीर्घकालिक जलवायु प्रभाव संदिग्ध था। उत्सर्जन को स्थायी रूप से कम करने के लिए प्रणालीगत परिवर्तन आवश्यक थे, न कि केवल अस्थायी झटके।




