
अमेरिकी सपनों की कब्रगाह: न्यूयॉर्क से उठी मानवता को शर्मसार करती चीख — गरीबी सही, परदेस की गुलामी नहीं
नई दिल्ली 12 अक्टूबर 2025 परदेस की चमक और भीतर की शून्यता: वह दूरी जो चुभती है इंसान जब अपने देश की सीमाएँ लांघकर किसी ‘परदेस’ की चकाचौंध, उसकी उन्नत सड़कों और तकनीकी विकास की झूठी चमक में कदम रखता है, तो शुरू में उसे लगता है कि उसने एक महान लक्ष्य हासिल कर लिया








