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WATCH VIDEO: वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़: क्यों ज़रूरी है राहुल गांधी का अंतरराष्ट्रीय संवाद

आलोक कुमार | 24 दिसंबर 2025 राहुल गांधी की हालिया जर्मनी यात्रा ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में तीखी बहस को जन्म दिया है। समर्थक इसे लोकतांत्रिक संवाद और वैश्विक विमर्श का स्वाभाविक हिस्सा मान रहे हैं, तो विरोधी इसे भारत की छवि के खिलाफ बता रहे हैं। लेकिन इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच एक

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प्रचार बनाम सच्चाई: ‘धुरंधर’ फ़िल्म, कंधार कांड और जवाबदेही से भागती विचारधारा

एबीसी डेस्क 20 दिसंबर 2025 आज के The Hindu में प्रकाशित लेख ‘How Dhurandhar is a prime example of government-embedded filmmaking’ कोई साधारण फ़िल्म रिव्यू नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक आलोचना है—जो यह सवाल उठाती है कि सिनेमा कब राष्ट्रवाद के नाम पर सत्ता-समर्थित प्रचार में बदल जाता है। लेख यह साफ़ करता है

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हरित भ्रम का खेल: नागरिक हाशिए पर, गाड़ियाँ कबाड़, लॉबी मालामाल और सिस्टम बेदाग… आ गए अच्छे दिन

प्रो. शिवाजी सरकार, अर्थशास्त्री नीति और पर्यावरण के नाम पर जो कुछ दिल्ली – एनसीआर में हो रहा है, वह आम आदमी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। ऐसा लगता है जैसे भारत ने एक अजीब कला सीख ली हो—चलती-फिरती, काम की चीज़ों को बोझ में बदल देना; लोगों की मेहनत की कमाई

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ओपिनियन | अनुशासन की राह पर कांग्रेस? सिद्धू दंपत्ति पर एक्शन से थरूर के बदले रुख !!

एबीसी डेस्क 19 दिसंबर 2025 कांग्रेस अगर पार्टी के अंदर अनुशासन मजबूत कर ले, तो उसके फिर से खड़े होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पार्टी के सामने असली चुनौती वही नेता रहे हैं जो कांग्रेस में रहकर पार्टी लाइन के खिलाफ बयानबाजी करते रहे। कई बार ऐसे नेताओं को RSS–BJP के “स्लीपर सेल” के

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जब कुर्सी बदलती है, विचार भी बदल जाते हैं: परमाणु ऊर्जा पर BJP का यू-टर्न

आलोक कुमार | नई दिल्ली 18 दिसंबर 2025 राजनीति में समय के साथ बहुत कुछ बदलता है, लेकिन कभी-कभी बदलाव इतने तेज़ और इतने साफ़ होते हैं कि सवाल पूछना ज़रूरी हो जाता है। साल 2008–10 में जब यूपीए सरकार अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील लेकर आई थी, तब भारतीय जनता पार्टी ने इसे

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ओपिनियन | मनरेगा को खत्म करने की साज़िश: गरीबों से अधिकार छीनने का नया रास्ता

एबीसी डेस्क | 18 दिसंबर 2025 काग़ज़ पर नाम बदला है, शब्द बदले हैं, आंकड़े सजाए गए हैं—लेकिन असलियत वही पुरानी है: गरीब से उसका अधिकार छीना जा रहा है। ‘विकसित भारत–जी राम जी बिल’ को जिस तरह “नई इबारत” बताकर पेश किया जा रहा है, वह दरअसल मनरेगा को धीरे-धीरे दफन करने की सोची-समझी

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अंधभक्तों की अंतहीन पीड़ा-पुराण: राहुल गाँधी क्यों चैन से नहीं रहने देते?

एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025 राहुल गाँधी से “अंधभक्तों” को शिकायतें हैं—इतनी गहरी, इतनी निजी, मानो उनका पासवर्ड बदल दिया गया हो। शिकायतें भी कैसी-कैसी! जर्मनी क्यों गए? अरे भाई, विदेश जाना अब देशद्रोह का प्रीमियम पैकेज हो गया है क्या? भट्टा–पारसौल क्यों गए? किसान के बीच जाना भी अब अपराध है—वो भी बिना कैमरा

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ओपिनियन | नेहरू पेपर्स और RSS–BJP की राजनीति: शब्दों की बाज़ीगरी, झूठ पड़ोसने की नीति

एबीसी डेस्क | 17 दिसंबर 2025 नेहरू पेपर्स को लेकर उठा मौजूदा विवाद दरअसल काग़ज़ों का नहीं, बल्कि राजनीतिक ईमानदारी और नैरेटिव कंट्रोल का है। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह RSS–BJP ने पहले “दस्तावेज़ गायब” होने का शोर मचाया और फिर संसद व आधिकारिक बयानों के ज़रिये उसी दावे से पीछे हटते हुए भाषा

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दुनिया के टॉप-5 सामाजिक सुरक्षा कवच में भारत के 2—मनरेगा और मिड-डे मील, कांग्रेस की ऐतिहासिक देन

कांग्रेस ने देश को क्या दिया? — यह सवाल अक्सर राजनीतिक बहसों में उछाला जाता है। लेकिन इसका जवाब नारेबाज़ी में नहीं, तथ्यों और वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्टों में छिपा है। वर्ष 2015 में विश्व बैंक समूह द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट “The State of Social Safety Nets 2015” इस बहस को ठोस आधार पर रख देती

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तीन बार प्रतिबंधित वही थे जो लड़े—जिन्हें कभी छुआ नहीं गया, जो माफीवीर थे वो बांट रहे देशभक्ति का सर्टिफिकेट

एबीसी डेस्क 17 दिसंबर 2025 भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ तथ्य इतने ठोस और असहज हैं कि उन पर बहस नहीं, बल्कि ईमानदार स्वीकारोक्ति की ज़रूरत है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को ब्रिटिश हुकूमत ने एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार प्रतिबंधित किया। यह संयोग नहीं था, बल्कि इस बात