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भारत में कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत

अप्रैल 2021 में भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने भयावह रूप ले लिया। संक्रमण की दर रिकॉर्ड तोड़ रही थी और प्रतिदिन चार लाख से अधिक मामले आने लगे। ऑक्सीजन, ICU बेड और दवाओं की भारी किल्लत हो गई, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई। कई अस्पतालों में मरीजों को दरवाज़े पर ही दम तोड़ना

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और कोरोना विस्फोट

उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2021 में पंचायत चुनाव कराए गए, जिसमें लाखों मतदाता और शिक्षकों ने भाग लिया। चुनाव प्रक्रिया में कोविड गाइडलाइंस का पालन नहीं हुआ और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना का विस्फोट हो गया। हजारों शिक्षक चुनाव ड्यूटी में संक्रमित हुए, और कई की मौत भी हुई। इसके चलते सरकार पर लापरवाही

अर्नब गोस्वामी केस और मीडिया स्वतंत्रता विवाद

टीआरपी घोटाले और कथित व्हाट्सएप चैट लीक को लेकर रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी एक बार फिर चर्चा में आए। लीक चैट में पुलवामा हमले से पहले की जानकारी और बालाकोट स्ट्राइक पर विवादास्पद टिप्पणियां सामने आईं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और पत्रकारिता की नैतिकता पर बहस छिड़ गई। विपक्ष ने सरकार पर मीडिया के

फरवरी में उत्तराखंड ग्लेशियर आपदा

उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। इस आपदा में दो जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं और सौ से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना में काम कर रहे मजदूर सुरंगों में फंस गए

गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड और लाल किले पर हिंसा

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली निकाली। यह आंदोलन कुछ हिस्सों में हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड्स तोड़ते हुए लाल किले तक पहुंच गए। वहां एक धार्मिक ध्वज भी फहराया गया, जिससे विवाद और तनाव और बढ़ गया। पुलिस और किसानों

भारत में COVID-19 वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत

भारत ने 16 जनवरी 2021 को विश्व के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। इसमें दो स्वदेशी वैक्सीन—कोविशील्ड और कोवैक्सिन—का प्रयोग हुआ। सबसे पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स, डॉक्टरों और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी गई। केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया। शीत श्रृंखला व्यवस्था, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और जनजागरण एक बड़ी चुनौती

CO₂ उत्सर्जन 7.8% घटा

2020 में, COVID-19 लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के कारण वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में लगभग 7.8% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट थी। हालांकि यह एक सकारात्मक पर्यावरणीय परिणाम था, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि यह एक अस्थायी गिरावट थी और इसका दीर्घकालिक जलवायु प्रभाव

COVID‑19 मंदी ने सबसे गहरी आर्थिक सूख पैदा की

2020 में COVID-19 महामारी के कारण हुई आर्थिक मंदी 1930 के दशक की महामंदी के बाद से सबसे गहरी वैश्विक आर्थिक मंदी थी। दुनिया भर में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन, यात्रा प्रतिबंध और उपभोक्ता खर्च में गिरावट ने व्यवसायों को बंद कर दिया, लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया।

वैश्विक महामारी ने 81 मिलियन लाख से अधिक संक्रमित और 1.8 मिलियन से ज्यादा मृत

2020 के अंत तक, COVID-19 महामारी ने दुनिया भर में 81 मिलियन (8 करोड़ 10 लाख) से अधिक लोगों को संक्रमित किया था और 1.8 मिलियन (18 लाख) से अधिक लोगों की जान ले ली थी। ये आंकड़े महामारी की विनाशकारी मानव लागत को उजागर करते हैं, जिसमें दुनिया भर के स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी