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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 8 अक्टूबर से भारत दौरे पर — व्यापार, सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों पर होगी अहम बातचीत

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नई दिल्ली 5 अक्टूबर 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर 8 अक्टूबर से भारत के बहुप्रतीक्षित आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। यह उनका पहला भारत दौरा होगा, जब से उन्होंने इस वर्ष यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़ी नीतियों के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर वार्ताएं अपने अंतिम चरण में हैं। इस समझौते को लेकर पिछले कुछ वर्षों से चर्चाएं जारी हैं, और उम्मीद की जा रही है कि स्टार्मर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली इस मुलाकात में करार पर अंतिम सहमति बन सकती है।

मुख्य एजेंडा — व्यापार और निवेश पर फोकस:

ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस दौरे में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर बल दिया जाएगा। भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023 में लगभग 36 अरब पाउंड का था, जिसे दोनों देश 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रख रहे हैं। स्टार्मर सरकार भारत को एशिया में सबसे मजबूत व्यापारिक साझेदार के रूप में देखती है। संभावना है कि इस यात्रा में ग्रीन एनर्जी, तकनीकी नवाचार, शिक्षा, रक्षा उत्पादन और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े कई समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

रक्षा और वैश्विक सुरक्षा पर चर्चा:

ब्रिटेन और भारत दोनों ही देशों की चिंता अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव और चीन की आक्रामक गतिविधियों पर केंद्रित है। इस दौरे के दौरान दोनों देश रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और आतंकवाद-रोधी प्रयासों को और मजबूत करने पर भी चर्चा करेंगे। भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि “स्टार्मर के साथ उच्चस्तरीय वार्ता में भारत की ‘मेक इन इंडिया डिफेंस पॉलिसी’ में ब्रिटेन की भागीदारी” पर भी बात होगी।

प्रवासी भारतीय और सांस्कृतिक जुड़ाव:

भारत में करीब 17 लाख ब्रिटिश नागरिकों की जड़ें भारत से जुड़ी हैं, और लगभग 7 लाख भारतीय मूल के लोग यू.के. में रहते हैं। स्टार्मर का यह दौरा प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ जुड़ाव को भी नया आयाम देगा।

लंदन से दिल्ली तक भारतीयों के बीच ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस दौरे को “संबंधों के पुनर्संतुलन” की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राजनयिक महत्व:

भारत के लिए यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद भारत जैसे देशों के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है ताकि उसका वैश्विक प्रभाव बना रहे। वहीं, भारत भी जी-20, ब्रिक्स और कॉमनवेल्थ प्लेटफॉर्म्स पर ब्रिटेन को एक सहयोगी के रूप में देखता है। राजनयिकों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में “नई ऊष्मा और व्यावहारिकता” लाएगी।

मोदी-स्टार्मर बैठक पर सबकी नज़र:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर के बीच 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में औपचारिक वार्ता होगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौते और संयुक्त घोषणाएँ होने की संभावना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा करेंगे, जिनमें जलवायु परिवर्तन, वैश्विक सप्लाई चेन, डिजिटल सहयोग और शिक्षा में साझेदारी शामिल है।

स्टार्मर का भारत दौरा ब्रिटेन की “इंडिया फर्स्ट स्ट्रैटेजी” का प्रतीक माना जा रहा है। यह संबंध न केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित हैं, बल्कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नई आर्थिक संभावनाओं और भू-राजनैतिक सहयोग के युग की शुरुआत भी कर सकते हैं।

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